अंबेडकरनगर। शुक्रवार देररात आई आंधी ने जिले के कई क्षेत्रों में दर्जनों टिनशेड व छप्परों को धराशायी कर दिया। कई विशालकाय पेड़ भी जमींदोज हो गए। आंधी के बीच गरज चमक से किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। हलकी बूंदाबांदी होने से गेहूं किसानों को फसल के बर्बाद होने की चिंता सताने लगी। हालांकि बूंदाबांदी का दौर कुछ देर में थम गया। आंधी के चलते जिले के अलग अलग क्षेत्रों में लगभग 25 हजार आबादी की विद्युत आपूर्ति भी प्रभावित हुई। 12 घंटे बाद बत्ती आने पर लोगों ने राहत की सांस ली। शनिवार सुबह 9 बजे से एक बार फिर तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया।
शुक्रवार शाम तक मौसम पूरी तरह साफ था, लेकिन देर रात अचानक मौसम ने पलटी मारा। धूल भरी आंधी चलने से शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक असर देखने को मिला। हवा इतनी तेज थी कि कई जगह टीनशेड व छप्पर उखड़ गए। अकबरपुर नगर के मालीपुर रोड निवासी राजेन्द्र तथा श्यामलाल का टीनशेड उखड़ गया, जबकि बसखारी रोड निवासी चाय विक्रेता सुरेश तथा इल्तिफातगंज रोड निवासी जवाहर का छप्पर क्षतिग्रस्त होकर गिर पड़ा। जिला मुख्यालय के अलावा कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह टिनशेड व छप्पर आंधी का शिकार हुए। संयोग यह रहा कि इनकी चपेट में कोई नहीं आया। महरुआ प्रतिनिधि के अनुसार नेशनल हाइवे अथार्टी द्वारा पहितीपुर व महरुआ के बीच बनवाया गया यात्री शेड भी आंधी के चलते क्षतिग्रस्त हो गया। उसका एक हिस्सा टूटकर आगे की तरफ लटक गया। आंधी का दौर इतना तेज था कि कई जगहों पर घर के बाहर सो रहे लोगों को चारपाई व बिस्तर समेत तेजी से अंदर की तरफ भागना पड़ा।
इसी बीच बूंदाबांदी भी शुरू हो गई। कुछ देर की बूंदाबादी के बाद ही आंधी थम गई। इससे पहले जमुनीपुर, बसखारी, बेवाना, जहांगीरगंज, मालीपुर, हंसवर, उतरेथू, भीटी, कटेहरी व महरुआ आदि क्षेत्रों में कई जगह विशालकाय पेड़ धराशायी हो गए। इससे कुछ देर के लिए कई जगहों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
बढ़ी किसानों की चिंता
शुक्रवार रात आंधी के साथ बूंदाबादी का दौर शरू हुआ तो किसान परेशान हो गए। जिन किसानों ने खेतों में गेहूं की फसल काटकर मड़ाई के लिए छोड़ा था, उन्हें फसल के उड़ जाने का डर सताने लगा। इसके अलावा तेज बारिश होने से गेहूं की फसल खेतों में गिरने की आशंका उत्पन्न हो गई। किसानों को यह भी चिंता हुई कि अगर तेज बारिश हुई तो फसल को व्यापक नुकसान होगा। साथ ही कटाई व मड़ाई का कार्य भी प्रभावित हो जाएगा। हालांकि आंधी व पानी का दौर ज्यादा देर नहीं चला। इसके थमने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली। किसान संतराम वर्मा का कहना है कि मौसम के बदले मिजाज ने किसानों के समक्ष मुश्किल पैदा कर दिया है। सप्ताहभर के अंदर दो दिन आंधी का दौर हो चुका है। इस बार फसल को सुरक्षित घर में पहुंचाने की चुनौती दिख रही है। किसानों को शुक्रवार देररात तो बारिश न होने से राहत मिल गई, लेकिन शनिवार सुबह एक बार फिर से तेज हवाओं का दौर शुरू हुआ तो चिंता बढ़ने लगी। इसी दौरान आसमान पर बादल भी छा गए। किसानों को लगा कि रात में बारिश न होने से राहत मिल गई, लेकिन अब बारिश होने पर नुकसान होना तय है। किसानों ने काटकर रखी गई फसल को बचाने का इंतजाम शुरू कर दिया। लगभग एक घंटे तक बादल छाए रहने के बाद यह दौर छट गया, तब जाकर किसानों की जान में जान आयी।
25 हजार आबादी की आपूर्ति ठप
आंधी के चलते शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की लगभग 25 हजार आबादी की विद्युत आपूर्ति रात में ठप पड़ गई। अकबरपुर, टांडा व जलालपुर नगर के अलग अलग हिस्सों में तार टूटने से लगभग 15 हजार की आबादी को रात में बिजली नहीं मिल पायी, जबकि बसखारी, आलापुर, अरियाबाजार व न्यौरी आदि क्षेत्र की लगभग 10 हजार आबादी को 12 घंटे बाद शनिवार दिन में बिजली मिल सकी। ज्यादातर जगहों पर तारों के टूटने से गड़बड़ी उत्पन्न हुई, जिसे शनिवार दिन में दुरुस्त कर लिया गया।