अंबेडकरनगर। राष्ट्रव्यापी आह्वान पर सोमवार को जिले में ग्रामीण बैंक की 44 शाखाओं में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। इससे लगभग 10 करोड़ रुपये के लेनदेन पर असर पड़ा। हड़ताली बैंक कर्मियों ने जिला मुख्यालय पर स्थित बैंक शाखा के निकट प्रदर्शन कर अपने हक की आवाज बुलंद की। इसमें ग्रामीण बैंकों के निजीकरण आदि को वापस लिए जाने की मांग प्रमुखता से शामिल की गई।
यूनाईटेड फोरम आफ आरआरबी के आह्वान पर सोमवार को जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित ग्रामीण बैंक की 44 शाखाओं में पूर्ण रूप से कामकाज ठप रहा। संबंधित बैंक शाखाओं में कर्मचारी तो पहुंचे, लेकिन उन्होंने बैंक का ताला नहीं खोलने दिया। बैंक के बाहर ही उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिला मुख्यालय पर स्थित बैंक शाखा के समक्ष प्रदर्शन करते हुए बैंक कर्मियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी उपेक्षा की जा रही है। नेतृत्व कर रहे यूनाईटेड फोरम आफ आरआरबी के जिला प्रवक्ता अनिल कुमार पांडेय ने कहा कि बैंकिंग पेंशन की समानता को लागू किए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। कहा कि ग्रामीण बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। यह बैंक कर्मियों के हक में कतई नहीं है। इससे बैंक कर्मियों का हक मारा जाएगा।
संगठन मंत्री विजय कुमार शुक्ला ने कहा कि अनुकंपा नियुक्तियों की सुविधा अगस्त 2014 से लागू किया जाए। कर्मचारियों को बैंकिंग उद्योग की तर्ज पर कंप्यूटर इंक्रीमेंट सुविधा प्रदान की जाए। प्रयोजक बैंकों की तरह वेतन, भत्ता व अन्य लाभ ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों को दिया जाए। सेवानिवृत्त अधिकारी श्यामधर त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीण बैंकों को भी भारतीय बैंकर्स संघ के साथ वार्ता मंच में शामिल किया जाए। कहा कि पेंशन का मार्ग अगर प्रशस्त किया जाता है, तो लगभग 25 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। वक्ताओं ने कहा कि अब और उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का निस्तारण नहीं हुआ, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस दौरान तरुण कुमार, हितेश पाण्डेय, वीरेंद्र कुशवाहा, संजीव, सौरभ कुमार, बृजेश सिंह, रामज्ञान मौर्य, आरके त्रिपाठी, एसएन पाण्डेय, राज सिंह, अनुराग पाण्डेय आदि मौजूद रहे। उधर हड़ताल के चलते लगभग 10 करोड़ रुपये का कार्य प्रभावित हुआ।
उपभोक्ताओं को हुई परेशानी
ग्रामीण बैंक शाखा अकबरपुर में मिली स्वयं सहायता समूह का संचालन कर रही रामपुर सकरवारी निवासिनी शांति देवी व सुशीला ने कहा कि वे समूह के लिए धननिकासी करने आई थी। यहां पहुंचकर पता चला कि बैंक में हड़ताल है। ऐसे में अब मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है। हजपुरा से आई सुदामा देवी व रेखा ने कहा कि वे भी स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। धनराशि की जरूरत थी। धननिकासी के लिए आई थी। यहां पता चला कि हड़ताल के चलते धननिकासी नहीं हो सकेगी। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हड़ताल की जानकारी पहले ही दिया जाना चाहिए। यदि हड़ताल की जानकारी होती, तो इतनी दूर न आना पड़ता। ग्रामीण बैंक शाखा अकबरपुर में रुपये जमा करने पहुंचे बेवाना के हरीराम ने कहा कि बैंक प्रबंधन को हड़ताल की जानकारी पहले से ही लोगों को दी जानी चाहिए। जानकारी के अभाव में बेवजह उपभोक्ताओं को बैंकों तक की दौड़ लगानी पड़ी।