अंबेडकरनगर। गुरुवार को जिले में विश्व जल दिवस को लेकर भले की तैयारियां प्रशासन ने कर रखी हैं। परंतु पूरे वर्ष जल संचयन को लेकर महज खानापूर्ति ही की गई है। तालाबों के सौंदर्यीकरण से लेकर झीलों की साफ-सफाई का कार्य सिर्फ कागजों में ज्यादा प्रभावी दिखाई पड़ता है। विभाग का दावा है कि इस वित्तीय वर्ष 333 नए तालाब खोदे गए हैं, लेकिन इन तालाबों में पानी है या नहीं इसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है। तालाबों पर हुए अतिक्रमण को लेकर भी कोई प्रभावी कार्रवाई जिले में होती नहीं दिख रही है। दर्जनों तालाब आज भी अवैध कब्जे के शिकार होकर रह गए हैं। ऐसे में शासन की जल संचय योजना कितना सफल हो पाएगी इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि 22 मार्च को विश्व जल दिवस है। प्रशासन की तरफ से जल संचयन को लेकर भले ही जब-तब गोष्ठियां होती हैं, लेकिन ठोस पहल होती नहीं दिख रही है। प्रशासन का पूरा जोर सिर्फ तालाबों को खोदने तक ही दिखता है। तालाब में पानी है, या नहीं इसकी सुध कोई नहीं लेता। इसके चलते ही लाखों खर्च कर बनने वाले तालाब न सिर्फ जल संचय योजना को झटका देते हैं, बल्कि आम लोगों को अपनी उपयोगिता का लाभ भी नहीं दे पाते। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में इस वित्तीय वर्ष मुख्यमंत्री जल संचय योजना के तहत 333 तालाब खोदा गया। इस पर 1 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक की धनराशि भी खर्च की गई है। कागज में यह तालाब खुदने के साथ ही पानी से लबालब भर दिए गए हैं। परन्तु हकीकत इससे कोसों दूर है। अधिकांश तालाब सूखे हैं, तो कुछ में पर्याप्त पानी ही नही है। खास बात तो यह है कि जिले में विगत वर्ष 2000 से अब तक विभिन्न योजनाओं के तहत 4800 तालाबों की खुदाई हुई है। इस पर करोड़ों का वारा न्यारा भी होना दिखाया गया है। इनमें से अधिकांश तालाब अतिक्रमण का शिकार हो गए हैं। जो अतिक्रमण से बचे हैं, वह बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं।
कुछ ऐसा ही हाल जिले में स्थित दो झील का भी है, जो विभाग व प्रशासन की उपेक्षा का शिकार हैं। कटेहरी विकास खंड क्षेत्र की दरवन व टांडा विकास खंड क्षेत्र स्थित हंसवर झील उपेक्षा का दंश झेल रही है। इन झीलों के सौंदर्यीकरण की जरूरत कभी महसूस नहीं की गई। जबकि दरवन झील में प्रवासी पक्षी भी आते हैं। जल संचय योजना को लेकर पसरी बेफिक्री के चलते ही तालाब, झील आदि की भूमि पर लगातार अतिक्रमण का दौर भी जारी है। अधिकारी सिर्फ कागजों में ही योजना को बेहतर बनाए हुए हैं।
कई बड़े तालाबों पर है अतिक्रमण
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के कटरिया सम्मनपुर व कोड़रा गांव के मध्य औरैया तालाब स्थित है। लगभग 32 बीघे क्षेत्रफल का यह तालाब अपने अस्तित्व से जूझ रहा है। संबंधित भूमि पर कई लोग फसल उत्पादन से लेकर अन्त तरीके से कब्जा जमाए हुए हैं। शिकायत के बावजूद तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने की जरूरत नही समझी जा रही है। मरथुआ सैरया के पोखरा तालाब पर भी अवैध तरीके से कुछ लोग अपना हक जताते हैं, जिनके द्वारा तालाब के पानी को ही निकाल दिया गया है। टांडा विकास खंड क्षेत्र के पैकोलिया गांव में छोटे बड़े 18 तालाब हैं। इन तालाब की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा है। बीते दिनों ग्रामीणों ने एसडीएम से मामले की शिकायत भी दर्ज करायी थी। परंतु इसके बावजूद तालाब की भूमि से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया।
जल संचय योजना के तहत हो रहे काम
मुख्यमंत्री जल संचय योजना के तहत जिले में प्रभावी ढंग से काम हो रहा है। अब तक 333 तालाब खोदे जा चुके हैं। तालाबों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए नहर व नलकूप विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। समय-समय पर तालाबों का निरीक्षण भी किया जाता है। -गिरीशचन्द्र पाठक, मनरेगा उपायुक्त