वोटरों ने दिखाया उत्साह, 66 प्रतिशत मतदान
अंबेडकरनगर। जनपद की तीन नगर पालिका परिषद व दो नगर पंचायत अध्यक्ष पद के 50 तथा सभासद पद के 663 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला रविवार को मतपेटियों में बंद हो गया। शाम तक 66.56 प्रतिशत मतदान हुआ। ज्यादातर केंद्रों पर वोटिंग के लिए मतदाता काफी उत्साहित दिखे जिसके चलते सुबह से ही लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। कुछ केंद्रों पर बीच-बीच में सन्नाटे की स्थिति रही।
नगर पालिका परिषद अकबरपुर, जलालपुर व टांडा और नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा व इल्तिफातगंज मेें अध्यक्ष और सभासद पदों के लिए रविवार को वोट डाले गए। मतदान को लेकर मतदाताओं में रविवार सुबह से ही उत्साह देखने को मिला।
पांचों निकाय क्षेत्र के 77 मतदान केंद्रों से जुड़े 254 बूथों पर सुबह साढ़े सात बजे से मतदान प्रक्रिया प्रारंभ होनी थी, लेकिन सुबह छह बजे से ही मतदान केंद्रों के निकट चहल पहल शुरू हो गई थी। साढ़े छह बजे के बाद से ही बूथों पर मतदान अभिकर्ता बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
सभासद व अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के अभिकर्ता मतदान शुरू होने से पहले केंद्रों पर मुस्तैद हो गए। साढ़े सात बजे के करीब मतदान प्रक्रिया प्रारंभ हुई। मतदान को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखाई दिया। कई बूथों पर सुबह से ही लंबी लाइनें लग गईं जो दोपहर बाद तक थीं।
अकबरपुर नगर के पुराने क्षेत्र में जहां सुबह से ही बूथों पर भीड़ दिखी, वहीं परिसीमन के बाद शहर में शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्र के वार्ड से जुड़े मतदाताओं में सुबह मतदान को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखा। वह दोपहर में घरों में निकले।
ज्यादातर केंद्रों पर सुबह नौ बजने तक मतदान जोर पकड़ चुका था। शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं का उत्साह 9 बजे तक दिखने लगा था। खास बात यह कि सुबह के समय मतदान के लिए महिलाओं का उत्साह दिखा तो 10-11 बजे के बाद पुरुषों की लाइनें लंबी होने लगीं।
प्रशासन के लिए राहत की बात यह रही कि शुरुआती दौर में कहीं से किसी खास गड़बड़ी की खबर नहीं आई। शुरुआती घंटों में मतदान तेजी से होता दिखा। पहले दो घंटे में लगभग 12 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। साढ़े 11 बजे तक करीब 29 प्रतिशत मतदान हो चुका था।
डेढ़ बजे तक जिले में 40 फीसद वोट पड़ चुके थे। शाम पांच बजे तक 66.56 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। इसके साथ ही अध्यक्ष के 5 पद के लिए 50 व सभासद के 103 पद के लिए 663 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतपेटियों में कैद हो गया।