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बाल विकास विभाग में खाली पड़े हैं 35 सुपरवाइजर के पद

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सुपरवाइजर के 35 पद खाली, कैसे हो आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन
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अंबेडकरनगर। आंगनबाड़ी केंद्रों का सुचारु संचालन हो भी तो कैसे जब सुपरवाइजराें के 90 पदों में 35 लंबे समय से खाली पड़े हैं। नतीजतन एक-एक सुपरवाइजर पर 50 से 55 आंगनबाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी है। इनमें भी 24 सुपरवाइजर ऐसे हैं, जो पांच वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर डटे हुए हैं। 10 सीडीपीओ के पद के सापेक्ष मात्र पांच पर ही तैनाती है।
बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत कुपोषित बच्चों व गर्भवती को शासन की योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण यह कि विभाग लंबे समय से स्टाफ की कमी है। जिले में दो हजार 545 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन पर दो लाख सात हजार बच्चे, 20 हजार से अधिक गर्भवती व 26 हजार से अधिक अतिकुपोषित बच्चे पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारु संचालन के लिए सुपरवाइजर के 90 पद सृजित हैं। हालांकि 55 पर ही तैनाती है जबकि 35 पद लंबे समय से रिक्त हैं। स्थिति यह है कि एक सुपरवाइजर पर 25 आंगनबाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी होनी चाहिए, वहीं मौजूदा समय में एक सुपरवाइजर पर 50 से 55 केंद्रों की जिम्मेदारी है। इनमें से 24 सुपरवाइजर ऐसे हैं जो पांच वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर जमे हैं। इससे केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों व गर्भवती को योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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नौ विकास खंड समेत अकबरपुर शहर में सीडीपीओ के 10 पद हैं। इनमें पांच पद लंबे समय से खाली हैं। नतीजतन पांच विकास खंड प्रभारी या सुपरवाइजर के भरोसे संचालित हैं। अकबरपुर में तैनात शेषनाथ वर्मा को शहर परियोजना का भी प्रभार दिया गया है। जलालपुर में तैनात बलराम सिंह को भियांव का प्रभार सौंपा गया। जहांगीरगंज में तैनात विनोद कुमार को बसखारी की जिम्मेदारी दी गई है। टांडा में दुर्गावती, रामनगर में फूलकली गौतम की तैनाती है। कटेहरी की जिम्मेदारी मुख्य सेविका रेनू सिंह व भीटी में सुपरवाइजर कमला आर्य को प्रभार दिया गया है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह के मुताबिक बाल विकास विभाग में रिक्त चल रहे सुपरवाइजर व सीडीपीओ के पद पर तैनाती के लिए शासन को कई बार पत्र भेजा गया। हालांकि जो भी स्टाफ हैं, वे केंद्रों का सुचारु संचालन कर रहे हैं।
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