टिन शेड के नीचे बिना तिरपाल पड़ा है गेहूं
-जिले में अनाज के सुरक्षित रख-रखाव की नहीं है समुचित व्यवस्था
-समितियों व क्रय केंद्रों पर गेहूं की सुरक्षा पूरी तरह रामभरोसे
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। गेहूं खरीद के बाद अब जिले में उसके भंडारण की समस्या उत्पन्न हो गई है। भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने का नतीजा है कि अभी भी चार हजार मीट्रिक टन गेहूं समितियों व क्रय केंद्रों पर पड़ा है। जिन गोदामों पर गेहूं का भंडारण किया गया है, उनमें से भी कई स्थानों पर पूरी तरह लापरवाही बरती जा रही है। मौजूदा समय में नवीन मंडी में टिन शेड के नीचे 1100 मीट्रिक टन गेहूं जमीन पर ही पर रख दिया गया है, तिरपाल भी नहीं डाला गया है। ऐसे में बारिश होने पर गेहूं के खराब होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
गौरतलब है कि 31 मई को गेहूं खरीद का कार्य जिले में समाप्त हो गया। 94 हजार पांच सौ मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 43 हजार 914 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी। लक्ष्य का 50 प्रतिशत भी गेहूं खरीद न होने के बाद अब गेहूं के भंडारण की समस्या बनी हुई है। बताते चलें कि जिले के टांडा में एफसीआई 4200 मीट्रिक टन क्षमता का स्थाई जबकि डुहिया में 1971 मीट्रिक टन, पाकीजा टाकीज टांडा मेें 1248 मीट्रिक टन, नवीन मंडी समिति में 2804 मीट्रिक टन व शाहगंज में एफसीआई का 44 हजार तीन सौ मीट्रिक टन क्षमता का भंडारगृह किराए पर लिया गया है। इन भंडार गृहों में गेहूं के रखरखाव को लेकर भी समुचित व्यवस्था नहीं है।
गेहूं की सुरक्षा को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नवीन मंडी समिति में मौजूदा समय में 1100 मीट्रिक टन गेहूं टिन शेड के नीचे रख दिया गया है। जमीन पर रखी गेहूं से भरी बोरियों पर तिरपाल भी नहीं डाला गया है। ऐसे में तेज हवा के साथ बारिश होने पर गेहूं की बोरियां भीग सकती हैं। इससे गेहूं के खराब होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। इतना ही नहीं, चार हजार मीट्रिक टन गेहूं अभी भी समितियों व क्रय केंद्रों पर मौजूद है। ढुलाई के अभाव में यह गेहूं भंडारगृह तक नहीं पहुंचाया जा सका है। इन समितियों व क्रय केंद्रों पर गेहूं की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे हैं। ज्यादातर बरामदे में ही गेहूं से भरी बोरियां रख दी गई हैं। एडीएम गिरिजेश त्यागी ने बताया कि गेहूं के समुचित रखरखाव व सुरक्षा के लिए गोदाम प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। गेहूं को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल की व्यवस्था की जा रही है।
गेहूं के रखरखाव की समुचित व्यवस्था न होने से विगत वर्ष 200 क्विंटल से अधिक गेहूं भीगने के चलते खराब हो गया था। नवीन मंडी समिति में टिन शेड के नीचे ही गेहूं की बोरियां रख दी गई थीं। तेज हवा के साथ हुई बारिश के चलते कई बार गेहूं भीग गया। उस पर तिरपाल भी नहीं डाला गया था। इसके चलते गेहूं सड़ गया। इसके अलावा समितियों व क्रय केंद्रों पर रखा लगभग सौ क्विंटल गेहूं भी रखरखाव के अभाव में खराब हो गया था।