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102 व 108 सेवा के संचालन के लिए नहीं तैनात हुए रिपोर्टिंग अधिकारी

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102 व 108 एंबुलेंस सेवा संचालन को तैनात नहीं हुए रिपोर्टिंग अधिकारी
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गर्भवती को घर से अस्पताल व वापस घर तक पहुंचाने को जिले में चलाई जा रहीं कुल 43 एंबुलेंस
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। गर्भवती व मार्ग दुर्घटनाओं में घायल मरीजों के लिए लाइफ लाइन साबित होने वाली 102 व 108 एंबुलेंस सेवा में पारदर्शिता लाने के लिए शासन के निर्देश के बावजूद अब तक जिले में रिपोर्टिंग अधिकारी की तैनाती नहीं की जा सकी है। दोनों की कुल 43 एंबुलेंस द्वारा एक वर्ष में लगभग 80 हजार मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल तक पहुंचाया गया है। इस बीच एंबुलेंस सेवा का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड या पहचान पत्र की अनिवार्यता लागू करने से आने वाले दिनों में मरीजों को कुछ मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि गर्भवती को घर से अस्पताल व अस्पताल से घर तक पहुंचाने के लिए जिले में 102 सेवा की कुल 26 एंबुलेंस हैं। इसके अलावा 108 सेवा की कुल 17 एंबुलेंस सेवाओं का संचालन मौजूदा समय में हो रहा है। मारपीट व सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित इलाज के लिए जिला अस्पताल या फिर सीएचसी व पीएचसी पहुंचाया जाता है। मरीजों व गर्भवती के लिए लाइफ लाइन बन चुकी इन सेवाओं के सुचारु संचालन में अक्सर विभिन्न प्रकार की समस्याएं आती हैं। कभी धनाभाव के चलते डीजल न मिलने की समस्या तो कभी एंबुलेंस की मेंटीनेंस में समस्या आती है। इसके बावजूद विभागीय आंकड़ों के अनुसार गत एक वर्ष में 102 सेवा के 26 वाहनों द्वारा 60 हजार से अधिक मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया गया जबकि 108 सेवा के 17 वाहनों द्वारा 16 हजार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया गया।
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इस बीच इन सेवाओं में मनमाने भुगतान के लिए बिल संबंधी गड़बड़ी रोकने व सेवा पर निगरानी के लिए नई व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इसके तहत सेवा का इस्तेमाल करने वाले मरीजों को अपना या फिर परिवारीजन का पहचान पत्र देना अनिवार्य होगा। रिकार्ड में पहचान पत्र संख्या का भी उल्लेख किया जाना होगा। इसके लिए जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी में एक-एक रिपोर्टिंग अधिकारी तैनात होगा जो समुचित रिकार्ड मेनटेन करेगा। इसके अलावा प्रत्येक माह की 10 तारीख को उसे महानिदेशालय को समूचा रिकार्ड उपलब्ध कराना होगा। सीएमओ डॉ. मोहिबुल्लाह ने बताया कि 102 व 108 एंबुलेंस सेवा के कुशल संचालन में कुल 175 कर्मचारियों की तैनाती है। बिल संबंधी किसी भी गड़बड़ी को दूर करने के लिए शासन का पत्र मिला है। शीघ्र ही संबंधित अस्पतालों में रिपोर्टिंग अधिकारी की तैनाती कर दी जाएगी।
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इलाज में हो सकती है समस्या
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि सेवा के संचालन में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया कदम सराहनीय तो है लेकिन इसमें आधार कार्ड व पहचान पत्र अनिवार्य किया जाना सही नहीं है। कारण यह कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी तमाम ऐसे लोग हैं जिनका आधार कार्ड नहीं बना है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह ने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। कोई जरूरी नहीं है कि मार्ग दुर्घटना में घायल होने वाला अपने साथ आधार कार्ड या फिर पहचान पत्र लेकर चलता ही हो। इसकी अनिवार्यता से मरीज को सेवा का समुचित लाभ मिलने में समस्या आ सकती है।
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