हाईकोर्ट ने इस्लामिक धर्मोपदेशक जाकिर नाईक की याचिका खारिज कर दी है। जाकिर ने झांसी की अदालत में चल रहे देशद्रोह के मुकदमे में जारी गैरजमानती वारंट को चुनौती दी थी। याचिका खारिज होने से उसकी गिरफ्तारी तय हो गई है। हालांकि, जाकिर देश से बाहर है। याचिका पर न्यायमूर्ति अमर सिंह चौहान ने सुनवाई की।
याचिका में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश झांसी द्वारा सात अप्रैल 2011 को जारी गैरजमानती वारंट और न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से जारी समन आदेश को चुनौती दी गई थी। याची ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने और मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने की मांग की थी। झांसी के मुदस्सिर उल्ला खान की मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया था। जाकिर नाईक पर आरोप है कि उन्होंने बंगलूरू में श्रीश्री रविशंकर के साथ हुई धार्मिक चर्चा के दौरान एक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां कीं। इतना ही नहीं उन्होंने पोस्टर और पम्फलेट छपवा कर बांटे, जिसमें समुदायों के बीच घृणा फैलाने वाली बातें लिखी थीं। जाकिर नाईक ने मुस्लिमों से कहा कि हर मुसलमान को आतंकवादी होना चाहिए।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जाकिर नाईक को तलब किया था। मुकदमे के खिलाफ सत्र न्यायालय में निगरानी दाखिल की गई, जिस पर कोर्ट ने जाकिर को तलब किया तथा हाजिर न होने पर गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। वादी मुकदमा की ओर से अधिवक्ता शाहिद अली सिद्दीकी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जाकिर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है, इसलिए याचिका में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं है। कोर्ट ने पक्षकारों को सुनने के बाद कहा कि मौजूद स्थिति में याचिका में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इलाहाबाद ऐतिहासिक मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष असरार नियाजी ने जाकिर की याचिका खारिज कराने के लिए शिद्दत के साथ पैरवी की।