सावन माह में युवा भी भगवान शिव की शरण में हैं। वे अपनी भविष्य के निर्माण के लिए भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में लीन हैं। कई युवक और युवतियां सोमवार का व्रत रख रहे हैं।
सावन में हाईवे पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा है। सावन के सभी चार सोमवार को भक्तों की आस्था सिर चढ़कर बोलती है। युवाओं ने बताया कि भगवान शिव उनके मन में इसलिए बसते हैं, क्योंकि उनका स्वरूप बनावटी नियम का दिखावे का मोहताज नहीं है। शिव अघोरी भी हैं और महायोगी भी। सोशल मीडिया और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत के बीच मंदिरों में समय बिताना, ध्यान करना और शिव भक्ति में शामिल होना, इन युवाओं को खूब भा रहा है। उनके लिए स्क्रीन टाइम से दूरी बनाने का यह एक सहज माध्यम बन रहा है। कई युवा इसे मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन से भी जोड़ रहे हैं।
भगवान शिव हमें सिखाते हैं कि सबकुछ होते हुए भी भीतर से शांत स्थिर और शून्य कैसे रहा जाए? भगवान शिव मेरी श्रद्धा एवं विश्वास मेरी ताकत है। प्रभु शिव पर अगाध आस्था है। मेरे घर में मंदिर जहां शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा हुई है, प्रतिदिन शिव को जल अर्पण करके ही विद्यालय जाता हूं।-सौम्य मिश्र
सावन में प्रतिदिन शिव मंदिर जाना, जल अर्पण करना और शांत भाव से बैठकर शिव तांडव का पाठ करना, यही मेरी दिनचर्या बन जाती है। भगवान भोलेनाथ की पूजा से असीम शक्ति और ऊर्जा मिलती है, जो आज सभी युवाओं के लिए बहुत जरूरी है।-निधि यादव
आज आधुनिकता के दौर में जड़ों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है। भगवान शंकर की पूजा और उपासना इसका श्रेष्ठ मार्ग है। पूरे सावन माह में शिव का निरंतर जाप करती हूं। पूर्ण विश्वास है कि शिव जी मेरी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे-आयुषी मिश्रा
श्रद्धा और विश्वास होना जीवन को संपूर्ण बनाता है। शिव की भक्ति सबसे सरल और सहज है। सावन माह शिवमय बना रहता है। उनके वैराग्य में सच्ची आजादी और स्वीकृति दिखाई देती है। उनका संदेश है कि दुनिया कुछ भी कहे, आप अपने ही भाव और स्वरूप में रहें।-रत्ना कृष्णात्री
झूंसी निवासी भगवान शिव की भक्त रत्ना कृष्णाश्री
झूंसी निवासी भगवान शिव की भक्त रत्ना कृष्णाश्री
झूंसी निवासी भगवान शिव की भक्त रत्ना कृष्णाश्री