जार्ज टाउन निवासी डॉ.मुकेश का 16 वर्ष का बेटा प्रतीक हर वह काम करता था, जो उसके पिता को पसंद नहीं है। फिर चाहे वह टीवी पर सीरियल्स देखना हो या फिर पढ़ाई के वक्त खेलना। बात-बात पर जवाब देना तो उसकी आदत में शुमार हो गया हैा उसके व्यवहार से परेशान अभिभावक उसे मनोविज्ञानशाला ले गए। जहां काफी प्यार से समझाने पर प्रतीक ने बताया कि उसे पिता को तकलीफ देने या फिर गुस्सा दिलाने में अच्छा लगता है क्योंकि कोई भी गलत हरकत करने पर पिता मारते या फिर डांटते हैं, इससे ज्यादा तो वह कुछ नहीं कर सकते।
बात करने पर प्रदीप के व्यवहार में आई विकृति के कारणों की परतें खुलती गई। प्रतीक ने बताया कि पिता से उसे हमेशा डांट ही मिली है। अच्छे काम के लिए कभी तारीफ तो मिली नहीं, हां नंबर कम आने पर या फिर दोस्तों के साथ थोड़ी देर ज्यादा खेल लेने पर मार जरूर पड़ी। इसीलिए अब वह जानबूझ कर वह काम करता हैं, जिससे उसके पिता को तकलीफ हो।
यह केस पढ़कर कहीं न आप भी सोच रहे होंगे कि कहीं मेरे बच्चे भी तो ऐसे नहीं हो रहे हैं। अगर उनके व्यवहार में इस तरह का बदलाव दिख रहा है तो संभल जाएं। सोचिए, बच्चों में आए इस तरह के नकारात्मक व्यवहार के पीछे कहीं आपका उनके प्रति किया जाना वाला व्यवहार तो नहीं। अगर आप बच्चों से जरूरत से ज्यादा टोका टाकी, बात-बात पर डांटना, झिड़कना, अपनी मर्जी थोपना और उनके मन की बातों- इच्छाओं को नजरअंदाज करते हैं तो इस आदतों को बदल लीजिए जिससे आप के बच्चों में व्यवहार में विकृति न आ सके।
मनोवैज्ञानिक अमिता श्रीवास्तव कहती हैं, बच्चों में व्यवहार विकृति से संबंधित काफी मामले आए हैं। उनकी काउंसलिंग के दौरान यह बातें सामने आईं कि उनके व्यवहार के पीछे कहीं न कहीं अभिभावकों का व्यवहार ही जिम्मेदार है। बच्चों के साथ ही अभिभावकों की काउंसलिंग भी की गई। टीन एजर्स ग्रुप में बच्चों में संवेगात्मक और हारमोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में बच्चों को विशेष रूप से समझने की जरूरत होती है। उनकी हर बात, हर गतिविधि पर टोकना, हर गलत चीज के लिए उन्हें दोषी ठहराना बंद करें। अगर आप गलत बात पर बच्चों को डांटते हैं तो उनके अच्छे प्रदर्शन पर उनकी तारीफ भी जरूर करें। उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने की पहल करें और अहसास दिलाए कि वह उनके लिए कितना ‘स्पेशल’ है।