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बारिश, ओलावृष्टि से जिले में 101.62 करोड़ का नुकसान

Wed, 15 Apr 2015 11:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से जिले में 101 करोड़ 62 लाख 56 हजार 177 लाख रुपये की फसल तबाह हो गई है। राजस्व एवं कृषि विभाग की ओर से जिले में गाटावार कराए गए सर्वे में नुकसान का आकलन किया है। सर्वे के मुताबिक जिले में कोई ऐसा गांव नहीं बचा, जहां किसानों को नुकसान न हुआ हो। कृषि विभाग ने राहत आयुक्त से 98 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांगी है।
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जिला कृषि अधिकारी अतींद्र सिंह ने बताया कि बारिश एवं ओलावृष्टि से हुए नुकसान का सर्वे कर लिया गया और विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि राहत आयुक्त से 98 करोड़ का बजट मांगा गया है। शासन की ओर से तीन करोड़ की धनराशि पहले ही मुहैया करायी जा चुकी है। जिला कृषि अधिकारी के मुताबिक जिले में कुल पांच लाख 42 लाख पंजीकृत किसान हैं।

 इनमें से बड़ी संख्या में किसानों को राहत सहायता मिलने की उम्मीद है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि बारिश और ओलावृष्टि से जिले के तकरीबन हर गांव में फसल तबाह हुई है। गंगापार के फूलपुर, मऊआइमा, सोरांव, कौड़िहार, बहरिया, नबाबगंज, प्रतापपुर और यमुनापार के बारा, मेजा, कोरांव, करछना, मांडा, शंकरगढ़, नारीबारी, जारी, खीरी जैसे इलाकों में गेहूं, चना, मटर, सरसों, मसूर, आलू, समेत सब्जी की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
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चौपट हुई फसलों के एवज में किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय लोकदल के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल डीएम भवनाथ सिंह से मिला। डीएम को ज्ञापन सौंपकर किसानों को राहत सहायता देने की मांग की। यह आरोप लगाया है कि राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा सर्वे में तमाम अनियमितताएं बरती जा रही हैं। जिलाध्यक्ष रामकृष्ण पटेल, अशोक कुमार , दिनेश सिंह, संगीता राय, हंसराज यादव, अरुण सिंह परिहार, सुलोचना आदिवासी, मेवालाल सिंह व सुशील सिंह चौहान शामिल थे।

भारतीय किसान सेना लोकतांत्रिक ने प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर हुए नुकसान के एवज में किसानों को 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की है। संगठन ने मृत किसानों के आश्रितों को नौकरी, 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, किसानों का ऋण माफ करने, खरीफ की बुआई के लिए बीज मुफ्त मुहैया कराने, किसानों के बच्चों का एजूकेशन ऋण माफ करने का मुद्दा उठाया है।
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