क्रिया योग आश्रम में योगाभ्यास करते साधक।
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यही वजह है कि उन्हें पश्चिम में योग का जनक माना जाता है। अपने जन्म के एक सदी से भी ज्यादा समय बाद योगानंद को अब दुनिया में प्राचीन भारतीय ज्ञान के सबसे महान दूतों में से एक माना जाने लगा है।
उनके काम ने विभिन्न धर्मों, पृष्ठभूमियों, जातियों और राष्ट्रीयताओं के लाखों लोगों के जीवन को आगे बढ़ाने में मदद की है। योगानंद की प्रसिद्ध पुस्तक ‘योगी आत्मकथा’ आध्यात्मिक साधकों को भारत की प्राचीन क्रियायोग पद्धति और विश्व के महानतम धर्मों के बीच अंतर्निहित सार्वभौमिक एकता के प्रति प्रेरित और आकर्षित करती रहती है। इससे हर व्यक्ति को सीख लेनी चाहिए। इस मौके पर अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों के अनुयायी मौजूद थे।