मेरा नाम यास्मीन है, मैं सऊदी अरब के दमाम में पैदा हुई लेकिन बाद में लंदन चली गई और वहीं पली-बढ़ी। हमारा जो क्रिएटर है, वह एक ही है। हालांकि मेरा मजहब इस्लाम है, लेकिन यहां इंडिया में जो शिवा का कनेक्शन है, वह मुझे काफी करीब लगता है। साथ ही इंडिया में जो संत हैं, वह भी बहुत प्रभावित करते हैं। यह कहना है कि लंदन से आई यास्मीन का जो संगम की रेती पर आकर अद्भुत रूप से अभिभूत दिखीं।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने भारत यात्रा और संगम की रेती के अनुभव साझा किए। बोलीं, मेरा कुंभ मेले में पहली बार आना हुआ है और यह मेरी पहली भारत यात्रा भी है। मैं लंदन से आई हूं। इंडिया में आने के साथ मेरी स्प्रिीचुअल जर्नी शुरू हुई है। यहां की स्प्रिीचुअलिटी मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित कर रही थी। यही सब बातें थीं जिसकी वजह से इंडिया मुझे बुला रहा था और आज मैं आ गई इंडिया। यहां आना मेरी स्प्रिीचुअल ज्वाइनिंग है। यहां के स्ट्रांग कल्चर के साथ मेरा कनेक्शन हो रहा है, माइंड ब्लोइंग जैसा एक्सप्रीरियंस है। स्प्रिीचुअल एक्सपीरियंस के लिए ही यहां आए हैं।
मेरी कोशिश होगी कि और एक्सप्रीरियंस के लिए कुंभ मेले के दौरान दोबारा आऊं। हमको तो यहां आना इतना अच्छा लगा है कि जैसे घर जाने का मन ही नहीं कर रहा है। यहां संगम की रेती पर बहुत ज्यादा एनर्जी है, लोग बहुत ही अच्छे हैं, हेल्पफुल हैं। यहां बहुत ज्यादा इज्जत और प्यार मिला। लोग बहुत ही मददगार हैं। संगम की रेती पर स्वागत करने के लिए मैं सभी का बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूं, यहां आकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मेरे पति स्टीवेन को भी यहां आना इतना भाया है कि वह भी दोबारा मेरे साथ कुंभ मेले में आएंगे।