पीसीएस परीक्षा में सवालों से संबंधित विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार को हुई पीसीएस-2018 की प्रारंभिक परीक्षा में भी गलत सवाल पूछे गए। अभ्यर्थियों ने परीक्षा के तुरंत बाद दो सवालों पर आपत्ति उठाई।
हालांकि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) अंतरिम उत्तर कुंजी में इन सवालों को हटाकर गलती सुधार सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछली लगातार दो परीक्षाओं में सवालों के विवाद से जुड़े मामले उच्चतम न्यायालय तक गए, इसके बावजूद आयोग के विशेषज्ञों ने सतर्कता नहीं बरती।
रविवार को पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में सवाल पूछा गया कि भारत सरकार द्वारा ‘महिला एवं बाल विकास’के लिए स्वतंत्र मंत्रालय कब स्थापित किया गया ? इसके चार विकल्प दिए गए, जिनमें वर्ष 1985, 1986, 1987 एवं 1988 शामिल हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि सवाल गलत है। सही विकल्प दिया ही नहीं गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि महिला एवं बाल विकास के लिए स्वतंत्र मंत्रालय का गठन वर्ष 2006 में किया गया, जबकि वर्ष 1985 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन किया गया था। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर भी यही जानकारी दी गई है, लेकिन विकल्प में वर्ष 2006 का जिक्र नहीं किया गया।
इसी तरह सवाल पूछा गया कि निम्न में से कौन से कथन सही हैं? सवाल हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा में पूछे जाते हैं। अंग्रेजी और हिंदी भाषा में दिए गए कथन नंबर तीन विरोधाभासी हैं। दोनों में अंतर है। अंग्रेजी भाषा में कथन दिया गया है, ‘इंडिया इज ए डिजास्टर फ्री कंट्री’ जबकि हिंदी भाषा में कथन है, ‘भारत आपदा युक्त देश है।’ अभ्यर्थियों का कहना है कि ‘डिजास्टर फ्री’ का मतलब है कि आपदा मुक्त और हिंदी में ‘आपदा युक्त’ है। ऐसे में यह सवाल भी गलत है।
उधर, आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि उत्तर कुंजी जारी करने से पहले विशेषज्ञ सवालों का परीक्षण करते हैं। जहां आवश्यकता होगी, संशोधन किया जाएगा। अभ्यर्थियों का नुकसान नहीं होगा।
विवादों से भी नहीं लिया सबक
पीसीएस परीक्षा-2016 में भी सवालों के विवाद से जुड़ा मामला पहले हाईकोर्ट और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक गया था। प्रश्नों के विवाद के कारण ही मुख्य परीक्षा के आयोजन में देरी हुई और अब तक परिणाम घोषित नहीं किया जा सका है। इसके अलावा पीसीएस-2017 में भी सवालों के विवाद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था और इस बार भी विवाद के कारण मुख्य परीक्षा के आयोजन में देरी हुई। अब तक दोनों मुख्य परीक्षाओं के परिणाम नहीं आए हैं। इतना कुछ होने के बावजूद गड़बड़ियां लगतार सामने आ रही हैं।