हाथों की छाप से पेंटिंग बनाने के सिओल के विश्व रिकॉर्ड को तोड़कर शुक्रवार को कुंभ में हस्तलिपि चित्रकारी का नया कीर्तिमान बनाया गया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के पर्यवेक्षक की मौजूदगी में गंगा पंडाल में लगातार आठ घंटे तक सात हजार से अधिक लोगों ने हाथों की छाप लगाकर इस विश्व रिकॉर्ड को बनाया। इससे पेंट माई सिटी के जरिए कुंभ की दिव्यता-भव्यता एक बार फिर विश्व पटल पर अंकित हुई।
कुंभ में पेंट माई सिटी के तहत देश भर के चित्रकारों ने शहर की दीवारों पर भारतीय संस्कृति व जीवन दर्शन पर आधारित चित्रकारी कर देश-दुनिया का ध्यान खींचा था। इसमें शहर की करीब 20 लाख स्क्वायर फीट दीवारों पर चित्रकारी की गई है। इसमें मुख्य रूप से सरकारी इमारतों की दीवारों, सेतुओं, चौराहों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टेशनों व अन्य सार्वजनिक स्थलों की दीवारों पर पेंट से आकृतियां बनाई गईं हैं। प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से पेंट माई सिटी के तहत की गई चित्रकारी को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने के लिए गंगा पंडाल में सुबह 10 बजे पेंटिंग वॉल पर हाथों की छाप लगाने की शुरुआत हुई। शाम छह बजे तक लगातार सात हजार से अधिक लोगों ने पेंटिग वॉल पर हाथों की छाप लगाई।
दोपहर बाद करीब तीन बजे ही सिओल के 4675 लोगों के हस्तलिपि चित्रकारी के विश्व रिकार्ड को तोड़ दिया गया। इसकी मॉनीटरिंग गिनीज बुक रिकार्ड के निर्णायक मंडल के प्रमुख ऋषिनाथ कर रहे थे। इस हस्तलिपि चित्रकारी में विदेशी पर्यटकों, सुरक्षा बल के जवानों, स्वच्छाग्रहियों, आमजनों, बच्चों और बुजुर्गों ने उत्साह से हिस्सा लिया। चित्रकारी के इस विश्व कीर्तिमान के क्षणों में मंडलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल, एडीजी एसएन साबत, मेलाधिकारी विजय किरन आनंद, डीआईजी कुंभ केपी सिंह उपस्थित थे। इस दौरान अफसरों ने भी हाथों की छाप लगाई। मंडलायुक्त ने कहा कि पूरे विश्व को चित्रकारी के माध्यम से प्रयागराज के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहलुओं की जानकारी मिलेगी। मेलाधिकारी का कहना था कि विश्व पटल पर हस्तलिपि की छाप पड़ने से यहां की संस्कृति, आध्यात्मिकता को नई पहचान मिलेगी तथा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।