केस नंबर 2-
कोरांव निवासी 12 वर्षीय बच्चे को अगस्त-2024 में एसआरएन अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग लाया गया था। इस दौरान बच्चे के पैरों के जोड़ टेढ़े हो गए थे। माता-पिता बच्चे का इलाज ग्रामीण क्षेत्र में करा रहे थे, जिसकी वजह से डीएमडी बीमारी का पता नहीं चल सका। बाद में जांच के दौरान पता चला कि बच्चे में डीएमडी बीमारी पूरी तरह से हावी हो चुकी है। ऐसे में बच्चा चार से पांच साल तक जीवित रह सकता है। फिलहाल बच्चे की फिजियोथेरेपी की जा रही है।
केस नंबर 3-
मध्य प्रदेश रीवां निवासी तीन वर्षीय बच्चे को मार्च-2024 में एसआरएन अस्पताल लाया गया था। इस दौरान बच्चे को चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी और बच्चे की मांसपेशियों में सूजन पाई गई। वहीं बच्चे के एंजाइम और जीन की जांच की गई, जिसमें डीएमडी बीमारी की पुष्टि हुई, मगर माता-पिता दोबारा बच्चे को एसआरएन अस्पताल दिखाने नहीं पहुंचे।
क्या है डीएमडी बीमारी
ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफ़ी (डीएमडी) एक आनुवंशिक बीमारी है, जिससे मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं। यह बीमारी आमतौर पर केवल लड़कों में ही पाई जाती है।
माता-पिता को चाहिए कि जब बच्चा गर्भ में पल रहा हो, तभी डॉक्टर की सलाह लेकर जीन की जांच करा लें। इस बीमारी के प्रति जागरूकता ही एकमात्र बचाव है। -- डॉ. प्रभात सिंह, न्यूरोलॉजी विभाग, सह आचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।