विश्वकप के फाइनल में भारत को मिली हार से सिर्फ भारतीय प्रशंसकों का दिल टूट गया, बल्कि सटोरियों को भी तगड़ा झटका लगा। शुरुआत से ही फेवरिट मानी जा रही टीम इंडिया की हार से सटोरियों के लाखों रुपये डूब गए। उधर सट्टा संचालकों की बल्ले-बल्ले रही और वह मालामाल हाे गए।
सूत्रों के मुताबिक, फाइनल मैच शुरू होने से पहले टीम इंडिया ही फेवरिट थी। ऐसे में दांव लगाने वालों ने भी सबसे ज्यादा टीम इंडिया पर भरोसा किया। यही वजह थी कि सट्टा बाजार में टीम इंडिया के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया को ज्यादा भाव दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, मैच शुरू होने से पहले 30-70 का भाव तय हुआ था। यानी टीम इंडिया पर 10 हजार का दांव लगाने पर जीत पर तीन जबकि ऑस्ट्रेलिया पर सात हजार का दांव लगाने पर जीत पर सात हजार रुपये मिलने थे।
विराट कोहली के क्रीज पर रहने तक भाव लगभग यही रहा लेकिन विराट के आउट होने के बाद भाव बदलने लगा। भारतीय पारी समाप्त होने पर भाव 40-60 का हो गया था लेकिन फेवरिट अब भी टीम इंडिया ही थी। ऐसे में भारतीय पारी की समाप्ति के बाद भी बहुत से सटोरियों ने टीम ंडिया पर ही दांव लगाया। ऑस्ट्रेलिया के तीन विकेट सस्ते में गिरने पर उनके चेहरे खिल उठे।
हालांकि इसके बाद हर बीतते पल के साथ उनके चेहरे के भाव बदलते गए। 15 ओवरों तक जहां उनके चेहरे खिले हुए थे वहीं इसके बाद हर बीतते ओवर के बाद उनके चेहरों पर मायूसी बढ़ती गई। अगले 15 ओवरों में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की ओर से जितनी भी बार गेंद सीमा रेखा के पास भेजी गई, सट्टेबाजों के चेहरे पर निराशा के भाव उसी तरह से और बढ़ता गया।
एक अनुमान के मुताबिक, भारत की हार पर कम से कम शहर में सटोरियों के 50 लाख रुपये डूब गए। जबकि सट्टा संचालकों की बल्ले-बल्ले रही और वह रातों रात मालामाल हो गए। शहर में धूमनगंज, खुल्दाबाद, शिवकुटी, अतरसुइया, करेली, नैनी में बड़े पैमाने पर सट्टा लगाया गया। करेली के रसूलपुर में सट्टेबाज गिरोह ने तो बकायदा खाने-पीने का इंतजाम भी किया था।