इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में जिस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव की सेवा समाप्त कर दी गई, उससे नाराज इविवि कार्य परिषद के सदस्य प्रो. सीएल खेत्रपाल ने सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विजिटर यानी राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेजा है और कहा है कि विश्वविद्यालय में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाए।
इविवि में वर्ष 1998 से 2001 तक कुलपति रह चुके प्रो. सीएल खेत्रपाल को चांसलर ने कार्य परिषद का सदस्य नामित किया था। सदस्य के रूप में यह उनका दूसरा कार्यकाल है। उन्हें तीन साल के लिए सदस्य नामित किया गया था। प्रो. खेत्रपाल ने राष्ट्रपति को भेजे इस्तीफे के माध्यम से कहा है कि उन्हें अपना इस्तीफा चांसलर को सौंपना चाहिए था लेकिन वर्तमान में विश्वविद्यालय में कोई चांसलर नियुक्त नहीं हैं। इसलिए वह राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज रहे हैं। प्रो. खेत्रपाल ने अपने इस्तीफे में कहा है कि मौजूदा कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय आत्मघाती स्थिति में आ गया है। कुलपति न तो कानून का सम्मान कर रहे हैं और न ही एक्ट एवं विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस को मानने को तैयार हैं। पिछले कुछ वर्षों में बतौर सदस्य उन्होंने विश्वविद्यालय को गर्त में जाते देखा है। हालात अब और बदतर हो गए हैं। लगातार दो वर्षों से एनआईआरएफ रैंकिंग में भी विश्वविद्यालय की साख गिरी है। पिछले दिनों यूजीसी कमेटी की आई रिपोर्ट इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि विश्वविद्यालय में किस तरह मनमानी हो रही है।
प्रो. खेत्रपाल ने अपने पत्र में 17 जून को हुई कार्य परिषद की बैठक का हवाला देते हुए कहा है कि उनके साथ दो अन्य सदस्यों ने भी रजिस्ट्रार कर्नल हितेश की सेवा समाप्त किए जाने पर अपना विरोध दर्ज कराया था, क्योंकि यह प्रक्रिया पूरी तरह से असंवैधानिक थी। बैठक में कुलपति ने इस इतना कहा कि जांच कमेटी ने कर्नल हितेश लव की सेवा समाप्त किए जाने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर मुहर लगाई जाती है। नियमत: जांच कमेटी को कर्नल हितेश लव का बयान दर्ज करना चाहिए था। उनका बयान आने के बाद रिपोर्ट कार्य परिषद की बैठक में सार्वजनिक होनी चाहिए थी और फिर इसकी समीक्षा के लिए अलग से कमेटी बनी चाहिए थे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कुलपति ने फरमान सुनाया और रजिस्ट्रार की सेवा समाप्त कर दी गई। यहां ध्यान देने की बात है कि कर्नल हितेश लव ने 35 साल सेना में रहकर देश की सेवा की और एक ईमानदार अफसर के रूप में उनका पूरा कॅरियर बेदाग रहे। ऐसे में यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत, असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण है। इन परिस्थितिथियों में समिति के सदस्य के रूप में काम कर पाना मुश्किल है, इसलिए इस्तीफा स्वीकार किया जाए।