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हड़बड़ी में काम, होगा तमाम

Mon, 10 Dec 2018 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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प्रयागराज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
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कुंभ कार्यों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री का सात दिन का अल्टीमेटम देना कई विभागों के अफसरों पर भारी पड़ेगा। शहर भर में करीब साल भर से चल रहे काम 7 दिन में पूरे होंगे, इसमें संशय है। मंथर गति से हो रहे विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर सीएम ने नाराजगी जताई है। इसके बाद अधिकारियों के काम करने की हड़बड़ी चिंता में बदल गई है। जमीनी हकीकत यह है कि कुंभ के अधिकांश कार्य 50 फीसदी भी पूरे नहीं हैं, जबकि पूर्णता का दावा 90 प्रतिशत का है। पेशवाई और मेला के मुख्य मार्ग बदहाल हैं। कुंभ मेला सिर पर है और पुराने शहर में चलना मुहाल है। सिविल लाइंस जैसे पॉश इलाके में काम फैलने से जाम लग रहा है।
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इस बार भव्य कुंभ, दिव्य कुंभ सिर्फ राज्य सरकार का ही नहीं बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ तक की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। 15 दिसंबर को अप्रवासी भारतीयों का दल यहां आएगा। ऐसे में देश का अंतरराष्ट्रीय सम्मान दांव पर हैं। जानकारों की मानें तो जिस गति से कुंभ के कार्य कराए जा रहे हैं, वह सात नहीं बल्कि 27 दिन में भी पूरे होने की स्थिति में नहीं दिख रहे। हालांकि सीएम के जाते ही सुस्ती दूर करने को अफसरों ने हंटर चलाया। ठेकेदारों की शामत आ गई। भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी दिन भर मशीनों की आवाजाही से वाहन फंसे रहे।

प्रमुख मेला, पेशवाई मार्ग उजाड़
स्टेशन से दारागंज तक हर तरफ बदहाली
लीडर रोड, जानसेनगंज, साउथ मलाका, बाई का बाग, रामबाग, बैरहना, अलोपीबाग, दारागंज में काम हैं अधूरा

कुंभ की शान बढ़ाने को अखाड़ों में संतों का डेरा जमने लगा है। हर डेरे में पेशवाई की तैयारियां जोरों पर हैं, पर प्रमुख मेला और पेशवाई मार्ग अभी तक उजाड़ हैं। स्टेशन से दारागंज तक हर तरफ अनियोजित काम के कारण बदहाली साफ दिख रही है। सड़क, फुटपाथ, नाली, बिजली, स्ट्रीट लाइट जैसे बुनियादी काम पूरे नहीं हैं। जहां सड़क काली कर दी, वहां फुटपाथ उखड़े हैं। जहां फुटपाथ बना दिए वहां स्लेप या पत्थर लगाने का काम बाकी है। जहां अन्य काम कर दिए वहां बिजली के खंभे तक नहीं लगाए जा सके हैं।
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लीडर रोड के स्टेशन चौराहे से जानसेनगंज तक अव्यवस्था फैली है। एक तरफ का रास्ता बंद कराए जाने के बाद भी नालियां नहीं बनाई जा सकी हैं। रविवार दोपहर नारायण मार्केट के सामने खोदाई, डिवाइडर के दोनों तरफ लगे मिट्टी के ढेर, काम की गति बयान करते दिखे। रेलवे माल गोदाम की तरफ मकानों की पोर्च में लाल पत्थर लगाए जा रहे हैं, लेकिन डिवाइडर जैसा महत्वपूर्ण काम अभी बाकी है। कहीं-कहीं बीच-बीच सड़क का आधा अधूरा काम कराया गया है, जो सुविधाजनक नहीं है। बगल ही सड़क तक फैला कूड़ा स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाता दिखा

जानसेनगंज चौराहे से साउथ मलाका तक पहुंचने वालों को कुछ राहत मिलती है, लेकिन विवेकानंद मार्ग पर पोर्च में लगाई गई टाइल्स उखड़ी दिखती हैं। राम मंदिर के पास ठाकुर दूध भंडार के पास ही नहीं कई स्थानों पर टूटी टाइल्स इस योजना पर ही सवाल खड़ी करती हैं। मानसरोवर को जाने वाली सड़क के तिराहे के  आसपास डामरीकरण से छूटी सड़क राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी है। नालियां ढंकी हैं, लेकिन गंदगी ऊपर पड़ी दिखी।

शहर के सभी रास्ते बंद होने के दौरान कई महीने तक शहरियों के  आवागमन का सहारा बनी निरंजन के बगल और मोहत्सिगंज की गलियां आज भी उखड़ी हैं। निरंजन के बगल गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सीवरेज का काम नहीं करा पाया है और मोहत्सिमगंज में गली का कुछ हिस्सा दशहरा से पहले दुरुस्त कराकर नगर निगम के अफसर भूल गए। हालात ये हैं कि निरंजन के बगल से आनाजाना बंद है और मोहत्सिमगंज की गली से सुबह से रात तक दोपहिया वाहन सवार हिचकोले खाते निकलने को मजबूर हैं।

साउथ मलाका से चंद्रलोक, रामबाग, ईदगाह, के रास्ते बाई का बाग में पेठा वाली गली के रास्ते आगे जाने वाले मौके पर पहुंच कर सिहर जाते हैं। सड़क गुम है, हर तरफ मलबा और गिट्टी फैली है। कहीं नाली तो कहीं डिवाइडर का काम सुस्त गति से हो रहा है। साफ है कि टूटे मकानों के बीच पैदल चलना मुहाल हो रहा है। न चौराहा दुरुस्त है और न ही रास्ते। रामबाग स्टेशन को जाने वाली सड़क तो बना दी लेकिन साउथ मलाका चौराहे का सब्जी मंडी और पुलिस चौकी का छोर उजाड़ खंड पड़ा है। चौराहा बनाने के लिए ईंट की जोड़ाई कर कर्व टाइल्स तो लगाई गई हैं, वहीं बेतरतीब बनी नालियां मुश्किल बढ़ा रही हैं। सेवा समिति से बाई का बाग चौराहे को जाने वाली सड़क पर करीब साल भर पहले बनाए गए डिवाइडर ही दिखते हैं। बाकी काम कब और कैसे होगा, यह बताने वाला कोई नहीं है।

बाई का बाग चौराहे से अलोपीबाग मंदिर तक आने जाने वाले हर दिन परेशान होते हैं। कहीं सड़क टूटी है तो कहीं पटरी खोदकर छोड़ी गई है। काम के बीच किसी तरह मिनटों का सफर घंटों में तय करने वाले शहरी व्यवस्था को कोसते हैं। लोगों का कहना है काम है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कभी डिवाइडर तो कभी सड़क निर्माण के लिए रोक टोक अब अलोपीबाग में फंसी है। यहां अभी भवनों के ध्वस्तीकरण का काम ही पूरा नहीं किया जा सका है। धूल के गुबार संग जाम का झाम लोगों को आज भी परेशान कर रहा है।

डॉट पुल दारागंज से घाट तक जाने वाली सड़क के दोनों तरफ सड़क चौड़ीक रण के लिए ध्वस्तीकरण से एक लाइन से टूटे दर्जनों मकान डराने के लिए काफी हैं। यहां सड़क तो दूर डिवाइडर और नाली, फुटपाथ का काम पूरा नहीं है। सड़क लगभग खाली कराई जा चुकी है, लेकिन कुंभ के लिए कराए जाने वाले निर्माण कार्य सुस्त हैं। मेला का यह मुख्य मार्ग अभी बदहाल है। यहां के स्थानीय निवासी स्थिति देखकर चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। यहां 15 दिसंबर तक काम पूरा कराना असंभव दिख रहा है।
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