जिला पुलिस के अफसरों के भी खेल निराले हैं। हाल यह है कि जिस पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत की गई, उन्होंने उसे ही मामले की जांच सौंप दी। मामला भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता की पिटाई का है। मामले की शिकायत पत्र भेजकर राज्यपाल, सीएम के साथ ही चीफ जस्टिस से की गई है।
मामला धूमनगंज का है जहां 27 जुलाई को घटना हुई। भाकियू कार्यकर्ता व व्यापारी नीरज कुशवाहा का आरोप है कि झलवा चौराहे पर उन्हें धूमनगंज इंस्पेक्टर अरुण कुमार चतुर्वेदी ने बेवजह सरेआम पीटा और फिर पुलिस जीप में बंद कर दिया। यही नहीं झलवा चौराहे पर फल की दुुकान लगाने वाले किसानों की दुकानें गालीगलौज करते हुए जबरन बंद करा दी गईं जबकि उन्होंने अपनी जमीन पर दुकानें लगाई थीं।
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुज सिंह ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत 28 जुलाई को पुलिस अफसरों के साथ ही जनसुनवाई पोर्टल पर की। जिसके बाद निस्तारण के लिए इसे जिला पुलिस अफसरों के पास भेजा गया। हैरत की बात यह है कि संबंधित अफसरों ने जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से की गई शिकायत की जांच धूमनगंज इंस्पेक्टर को ही सौंप दी जिन पर मारपीट का आरोप है।
अफसरों ने उन्हें प्रकरण की जांच कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने को निर्देशित किया है। लेकिन सवाल यह है कि जिस पर आरोप है, उसे ही जांच क्यों सौंप दी गई। फिलहाल भाकियू जिलाध्यक्ष ने मामले की लिखित शिकायत राज्यपाल, सीएम के साथ ही चीफ जस्टिस से की है। इस मामले में एसएसपी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।