बुलंदशहर के नेशनल हाईवे-91 पर लगातार हो रही रेप की घटनाओं पर गंभीर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले ने कहा, ‘मैं महाराष्ट्र से आता हूं, वहां हालत इतने खराब नहीं हैं, महिलाएं आधी रात को भी घर से निकल जाएं तो कोई उन पर उंगली उठाने वाला नहीं है। यहां पूरा परिवार कार से जा रहा है और कार रोककर महिलाओं से रेप किया जाता है।’ घटना को लेकर बुलंदशहर पुलिस द्वारा पेश रिपोर्ट पर भी अदालत ने सवाल उठाया। पूछा कि इसमें एफआईआर का प्रोफार्मा है, मेडिकल रिपोर्ट नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट की जगह इंजरी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। क्या आप लोग रेप की मेडिकल रिपोर्ट और इंजरी रिपोर्ट का फर्क नहीं जानते हैं।
पुलिस ने कोर्ट के समक्ष पीड़ित महिलाओं के बयान की प्रति भी प्रस्तुत नहीं की है। इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि आप ने क्या जांच की है, समझा जा सकता है। कोर्ट ने अखबारों में प्रकाशित रेप की दो और घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि तीन माह से कम समय में हाईवे पर पांच रेप की घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से कुछ में तो पुलिस ने प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की है। सात और 12 जुलाई को हुई दो घटनाओं का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि एक महिला को चलती वैन से उतार कर रेप किया जाता है और पुलिस उसकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करती है। ऐसा लगता है कि हाईवे पर कोई गैंग काम कर रहा है। इसका सरगना कौन है पता लगाया जाना चाहिए।
सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि मीडिया ने घटना को बढ़ा चढ़ाकर छापा है। इस पर पीठ का कहना है कि अखबार अपनी जानकारी में पुलिस सूत्रों का हवाला दे रहा है। इसका अर्थ है कि पुलिस को इन घटनाओें की जानकारी थी। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता नहीं समझी गई। अगर सरकार का यही रवैया है तो हमें कड़े आदेश पारित करने होंगे। पीठ ने शुक्रवार को पीड़ितों का बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अपर महाधिवक्ता इमरान उल्लाह और शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बताया कि पुलिस पूरी गंभीरता से इस मामले की जांच कर रही है। सीलबंद रिपोर्ट में हाईवे पर किए जा रहे सुरक्षा इंतजामों की भी जानकारी दी गई है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।