मूलत: वाराणसी के रहने वाला मुसहर समाज का एक परिवार नीबी गांव में रहकर पत्तल और दोना बेचकर अपना गुजर-बसर करता है। ऐसी परिवार के नखड़ू की पत्नी 24 वर्षीय अनीता काफी दिनों से बीमार चल रही थी। नखड़ू और उसका पिता मैनेजर गांव के ही किसी तांत्रिक के यहां उसकी झाड़-फूंक करा रहे थे।
गरीबी का दंश। जीते जी बीमार पत्नी का इलाज न करा सका। मौत के बाद उसके कफन और अर्थी तक के पैसे नहीं। मजबूर पति ने चादर में पत्नी का शव लपेटा, बांस में बांधकर अपने पिता के साथ पैदल ही अंतिम संस्कार को चल पड़ा। तंगहाली की यह घटना झूंसी के नबी गांव की है।
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मूलत: वाराणसी के रहने वाला मुसहर समाज का एक परिवार नीबी गांव में रहकर पत्तल और दोना बेचकर अपना गुजर-बसर करता है। ऐसी परिवार के नखड़ू की पत्नी 24 वर्षीय अनीता काफी दिनों से बीमार चल रही थी। नखड़ू और उसका पिता मैनेजर गांव के ही किसी तांत्रिक के यहां उसकी झाड़-फूंक करा रहे थे। शुक्रवार को अनीता ने दम तोड़ दिया।
नखड़ू पैदल ही शव लेकर दारागंज घाट की ओर जा रहा था। तकरीबन पांच किलोमीटर चलने के बाद जब वह झूंसी की आवास विकास कॉलोनी योजना तीन पहुंचा तो कुछ लोगों की नजर पड़ी। लोगों ने तत्काल उसे रोका। घटना की जानकारी पुलिस को दी। इस पर चौकी इंचार्ज नवीन सिंह मौके पर पहुंचे। इसी बीच मुंशी का पुरा गांव के सुभाष यादव और ओम प्रकाश ने गरीब मुसहर परिवार को एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी।
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इतने में सैकड़ों लोगों ने कई हजार रुपये चंदा एकत्र कर गरीब परिवार को सौंप दिया। चौकी इंचार्ज नवीन ने एक ई-रिक्शा करके उस पर शव को लदवाकर झूंसी के छतनाग घाट भिजवाया। बाद में वहीं पर महिला के शव का अंतिम संस्कार किया गया। घटना का संज्ञान होते ही जिलाधिकारी ने जांच बैठा दी है। पीड़ित को आयुष्मान कार्ड या आवास, जिसका भी पात्र होगा। मुहैया कराया जाएगा।