समूह-ग और घ के साथ ख वर्ग के अराजपत्रित पदों के लिए साक्षात्कार खत्म करने के प्रदेश सरकार के फैसले से लोक सेवा आयोग समेत अन्य संस्थाओं की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करना होगा। आयोग की सीधी भर्तियों पर ब्रेक लगने की बात कही जा रही है। अब इन पदों के लिए भी लिखित परीक्षा करानी होगी। इतना ही नहीं अन्य संस्थाओं की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव के साथ उनका सांगठनिक ढांचा भी बदलना पड़ेगा।
लोक सेवा आयोग की ओर से अलग-अलग विभागों में अवर अभियंता समेत कई पदों के लिए सीधी भर्ती यानी, सिर्फ साक्षात्कार के आधार पर भर्ती की जाती है। इनमें से ज्यादातर समूह-ख के ऐसे पद शामिल हैं जो राजपत्रित नहीं हैं। इनके अलावा समूह-ग के पद भी शामिल हैं। इन भर्तियाें में पक्षपात के लगातार आरोप लगते रहे हैं। कैबिनेट की बैठक का फैसला लागू हुआ तो आयोग को अब इन पदों के लिए लिखित परीक्षा करानी होगी और उसी के आधार पर भर्ती होगी। इसके अलावा आयोग की दूसरी सबसे बड़ी भर्ती लोअर सबऑर्डिनेट में शामिल ज्यादातर पद समूह-ग के हैं।
इस भर्ती का अंतिम परिणाम मुख्य परीक्षा तथा इंटरव्यू के आधर पर घोषित किया जाता है लेकिन अब इन पदों के लिए भी साक्षात्कार नहीं होगा। मुख्य परीक्षा के आधार पर ही अंतिम परिणाम घोषित होगा या नया प्रावधान लागू करना होगा। हालांकि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले आयोग की नियमावली में बदलाव करना होगा। इसी तरह से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन ही समूह-ग के पदों की भर्ती के लिए हुआ है। आयोग की ज्यादातर भर्तियां विवादित रहीं है। इस फैसले के बाद अधीनस्थ की भर्तियों में साक्षात्कार की व्यवस्था ही खत्म हो जाएगी। विभागों के स्तर पर भी होने वाली भर्तियां भी लिखित परीक्षा या एकेडमिक मेरिट के आधर पर होंगी। इसी तरह से विभाग या अन्य स्तर पर भी इन पदों पर होने वाली भर्तियों की नियमावली में बदलाव करना होगा।
भर्तियों में पारदर्शिता के दावों को लेकर साक्षात्कार खत्म करने के फैसले का प्रतियोगियों और छात्रों के बड़े वर्ग ने स्वागत किया है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि समूह-ग और घ के पदों के लिए पर्सनालिटी का बहुत महत्व नहीं होता। प्रशांत सिंह का कहना है कि इसके अलावा साक्षात्कार में चहेतों को अतिरिक्त लाभ देने तथा भ्रष्टाचार के हमेशा आरोप लगते रहे हैं। लोक सेवा आयोग की भर्तियाें की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया है। इसमें साक्षात्कार में कुछ लोगों को अतिरिक्त लाभ देने का भी आरोप शामिल है। इसके अलावा जल निगम की भर्ती तो निरस्त कर दी गई है। इस तरह की धांधली से राहत मिलेगी। ऊंचवागढ़ी के आशीष मिश्र का कहना है कि अब उन्हें साक्षात्कार के लिए अतिरिक्त तैयारी नहीं करनी होगी। आर्थिक रूप से कमजोर प्रतियोगी लिखित परीक्षा की तैयारी करके पहले कोई नौकरी पाना चाहेंगे। उसके बाद पीसीएस आदि की तैयारी करेंगे। इससे उन्हें योजनाबद्ध तरीके से तैयारी में मदद मिलेगी।
प्रतियोगियों ने विभागों के स्तर पर भर्ती करने की व्यवस्था खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि जल निगम में अलग-अलग पद, लेखपाल समेत विभाग के स्तर पर हुईं अनेक भर्तियों को लेकर विवाद है। इसकी वजह से कई भर्तियां निरस्त कर दी गईं। प्रतियोगियों का कहना है कि इसमें पूरी भर्ती प्रक्रिया एक विभाग के अफसरों के नियंत्रण में होती है। इसकी वजह से धांधली की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा भर्ती का सेटअप नहीं होने से भी गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है। इसलिए आयोग तथा अन्य भर्ती संस्थाओं के अंतर्गत ही सभी तरह की भर्तियां कराई जानी चाहिए।