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समय के साथ नहीं बदल रहे कोर्स

Sun, 25 Sep 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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allahabad
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इलाहाबाद। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में शनिवार को युवा जोश हिलोरे मार रहा था। संस्थान के दीक्षांत समारोह में 446 छात्र-छात्राओं ने उपाधि ग्रहण करने के साथ यह संकल्प लिया कि देश और समाज के विकास में जिम्मेदारी निभाने के लिए अब वे तैयार हैं। बीटेक इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन के शुभम खत्री को चेयरमैन स्वर्ण पदक से नवाजा गया। साफ्टवेयर उद्योग के जनक कहे जाने वाले 93 वर्षीय पद्मभूषण डॉ.एफसी कोहली की बतौर मुख्य अतिथि मौजूदगी भी विद्यार्थियों का हौसला बढ़ा रही थी।
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डॉ.एफसी कोहली ने शिक्षा पद्धति, खासतौर पर इंजीनियरिंग शिक्षा पर चिंता जताई। इसमें सुधार के लिए उन्होंने समय के साथ पाठ्यक्रमों में बदलाव का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ज्यादातर विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थानों में कोर्स आउटडेटेड हो चुका है। 10-11 वर्ष से सिलेबस में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जबकि, तकनीकी हर छह महीने में बदल रही है। बदलाव के इस क्रम में पाठ्यक्रमों की भी समीक्षा करनी होगी। उन्होंने बताया कि 1200 शीर्ष तकनीकी संस्थान हैं लेकिन उनमें संसाधन की कमी है। प्रयोगशाला, लाइब्रेरी का अभाव है तो अध्यापकों की भी कमी है। डॉ.कोहली ने डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों से अपील की कि देश के विकास में वे अपनी भूमिका खुद सुनिश्चित करें। देश को टॉप क्लास इंजीनियरों की जरूरत है। इस कमी को वे पूरा करें। उन्होंने कहा कि, अनुशासित जीवन, कठिन परिश्रम और संतुष्टि ही सफलता के मूल आधार हैं। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन रविकांत ने संस्थान की कार्यव्यवस्था में पारदर्शिता लाने, आत्मनिर्भर बनाने की बात कही। उन्होंने शीर्ष संस्थानों के बीच एकेडमिक समझौते बढ़ाने पर जोर दिया।
इससे पहले संस्थान में सुबह 9.30 बजे पारंपरिक तरीके से ग्यारहवें दीक्षांत समारोह का आगाज हुआ। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन रविकांत और निदेशक प्रोफेसर जीसी नंदी ने मेधावियों को मेडल तथा उपाधि दिए। निदेशक प्रोफेसर नंदी ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी और उपलब्धियों को गिनाया। समारोह में बीटेक आईटी के 282, बीटेक ईसी के 87 छात्र-छात्राओं को उपाधि दी गई। एमटेक सत्र 2014 में बायो इंफारमैटिक्स के दो, साइबर ला में तीन, मानव कम्प्यूटर इंट्रैक्शन में पांच, इंटेलिजेंट सिस्टम में आठ, रोबोटिक्स में छह, साफ्टवेयर इंजीनियरिंग में 13, वायरलेस कम्युनिकेशन एवं कम्प्यूटिंग में 10, माइक्रोइलेक्ट्रानिक्स में पांच विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। सत्र 2013 के एक छात्र को एमटेक की डिग्री दी गई। इनके अलावा 18 विद्यार्थियों को एमबीए की डिग्री प्रदान की गई। छह शोधार्थियों ज्ञानेेंद्र वर्मा, मंजूष पांडेय, दिव्या लोहानी, राजीव रंजन, अनुप नंदी और अश्वय राव को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
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दीक्षांत समारोह के दौरान तो विद्यार्थियों ने धैर्य दिखाया लेकिन इसके बाद जोश और उल्लास का जो दौर शुरू हुआ तो शाम तक चला। विद्यार्थियों ने हैट उड़ाकर खुशी का इजहार किया। उन्होंने इस पल को कैमरे में भी कैद किया। ग्रुप में फोटो और सेल्फी लेने का दौर लगातार जारी रहा।

इन्हें मिला पदक
इलाहाबाद (ब्यूरो)। बीटेक ईसी के शुभम खत्री को चेयरमैन गोल्ड मेडल दिया गया। एमटेक आईटी के मुनेंद्र पांडेय और प्रियांशु गोयल को गोल्ड, उमेश शुक्ला को सिल्वर एवं हर्ष जैन को ब्रांज मेडल मिला। एमटेक ईई में भारती देवी को गोल्ड, डूसा राजेंद्र को सिल्वर तथा बंचा दत्ता को ब्रांज मेडल मिला। एमबीए आईटी में जया अनिल ने गोल्ड, इला श्रीवास्तव ने सिल्वर तथा स्नेहिल श्रीवास्तव ने ब्रांज मेडल प्राप्त किया। बीटेक आईटी में मानसी अवस्थी को स्वर्ण पदक मिला। अनिरबन इंद्रनाथ घोस को रजत तथा अभिरुचि गुप्ता को कांस्य पदक मिला। बीटेक ईसीई में शुभम खत्री को गोल्ड, शुभम गुप्ता को सिल्वर तथा विनित वर्मा को ब्रांज मेडल मिला।

स्थानीय भाषा में दें शिक्षा, विकसित हो साफ्टवेयर
इलाहाबाद (ब्यूरो)। ट्रिपलआईटी में दीक्षांत समारोह के बाद मीडिया से मुखातिब डॉ.कोहली ने मातृ भाषा में शिक्षा की सुलभता की वकालत की। उन्होंने कहा कि साफ्टवेयर इंडस्ट्री में चीन भारत से आगे निकल गया है। अमेरिका से यहां की आबादी तीन गुना है लेकिन तीन गुना ब्रेन नहीं है। इसकी मुख्य वजह स्थानीय भाषा में शिक्षा उपलब्ध नहीं होना है। इसी कारण बड़ी आबादी ज्ञान से वंचित है। उन्होंने संस्थानों और विद्यार्थियों से स्थानीय भाषा में साफ्टवेयर विकसित करने की अपील की।

ट्रिपलआईटी के 370 में 362 का प्लेसमेंट
इलाहाबाद (ब्यूरो)। सत्र 2015-16 में ट्रिपलआईटी के कुल 370 में से 362 विद्यार्थी अच्छी नौकरी पाने में सफल रहे। इनमें से 310 विद्यार्थियाें का वार्षिक वेतन पांच लाख रुपये से अधिक है। किसी छात्र को अधिकतम 27 लाख तथा न्यूनतम 3.22 लाख रुपये वार्षिक वेतन की नौकरी मिली है। सत्र 2015-16 में कुल 66 कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आईं। 112 विद्यार्थियाें को ड्रीम कंपनी में सफलता मिली है। इन 123 विद्यार्थियों का औसत वेतन 13.94 लाख रुपये वार्षिक है। उन्होंने बताया कि प्लेसमेंट के मामले में संस्थान का पूरे देश में पांचवां स्थान है।

संस्थान जारी करेगा श्वेत पत्र
इलाहाबाद (ब्यूरो)। ट्रिपलआईटी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) के चेयरमैन रवि कांत ने अफसरों को संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की बाबत श्वेत पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। चेयरमैन का पद संभालने के बाद बीओजी की पहली बैठक में उन्होंने इसका निर्देश दिया। इसकी जिम्मेदारी डीन्स को दी गई है। उन्होंने कहा कि विगत पांच साल में संस्थान ने क्या किया, समाज को उसका क्या लाभ हुआ, आने वाले पांच वर्षों में संस्थान क्या करने जा रहा है इसका श्वेत पत्र जारी किया जाए। उन्हाेंने बताया कि संस्थान को संसाधन के मामले में पांच साल में आत्मनिर्भर बनना होगा। इसके लिए उन्होंने लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर रिसर्च करने और उसे लोगों तक पहुंचाने की बात कही।

खुद की कंपनी खोलना चाहते हैं शुभम
ट्रिपलआईटी के चेयरमैन पदक से नवाजे गए शुभम खत्री भविष्य में खुद की कंपनी खोलना चाहते हैं। इससे पहले उनका लक्ष्य प्रतिष्ठित संस्थान से मास्टर डिग्री हासिल करना है। मध्य प्रदेश के रतलाम के राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मनोज खत्री के पुत्र शुभम वर्तमान में वालमार्ट  बंगलूरू ऑफिस में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। शुभम की मात्रा उषा खत्री गृहणी हैं।
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