इलाहाबाद। वाणिज्य कर विभाग के अफसरों को अब जांच के दौरान माल लदे ट्रकों को बेवजह रोकना महंगा पड़ेगा। जांच के नाम पर ट्रक को कई दिनों तक रोकने के कारण ट्रांसपोर्टर को भारी आर्थिक नुकसान होता है। ऐसे ही एक मामले में ट्रांसपोर्टर की ओर से विभाग के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली गई, जहां से विभाग को दोषी मानते हुए ट्रांसपोर्टर को हर्जाना देेने का फैसला हुआ तो उच्चाधिकारी जाग गए। ऐसे में वाणिज्य कर मुख्यालय ने ट्रकों को न रोकने का आदेश दिया है।
मार्ग में जांच के दौरान वाणिज्य कर विभाग के अफसर माल को कई-कई दिनों तक बेवजह रोक लेते हैं, जबकि मुख्यालय से आदेश है कि मामले का निस्तारण समयसीमा के भीतर ही किया जाए। थाने और कार्यालयों पर माल रुक जाने से व्यापारी को तो नुकसान होता ही है, कई-कई दिनों तक ट्रक खड़ा रहने के कारण ट्रांसपोर्टर को भी आर्थिक क्षति होती है। इसे लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा ने मुख्यालय स्तर पर शिकायत की थी। कई व्यापारी और ट्रांसपोर्टर ने संबंधित जोन कार्यालय से लेकर मुख्यालय तक यह मामला उठाया, लेकिन उच्चाधिकारी उस दौरान गंभीर नहीं हुए।
ऐसे ही एक मामले में पिछले महीने मथुरा की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी ने विभाग के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने कास्ट एवार्ड करते हुए ट्रांसपोर्टर को हर्जाना देने का आदेश विभाग को दिया। साथ ही संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के विरुद्ध भी कार्रवाई करने का आदेश दिया। यह भी कहा कि भविष्य में सरकारी कर्मचारी मनमानी कार्रवाई न कर सकें। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बाद वाणिज्य कर कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने आदेश जारी किया कि जांच के दौरान माल रोकना या अभिग्रहण करना आवश्यक हो तो यह कार्य निश्चित समयसीमा में किया जाए और ट्रक को तत्काल छोड़ दिया जाए। अन्य मामले में अगर माल रोकने की आवश्यकता हो तो उसे अभिग्रहीत कर ट्रक को न रोका जाए। कमिश्नर ने इस आदेश का पालन न करने पर अफसरों को उत्तरदायी ठहराते हुए गंभीर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
वाणिज्य कर विभाग में फॉर्म-52 के जरिए वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 29 जनवरी है। इस अवधि तक रिटर्न न दाखिल करने वाले व्यापारियों को 10 हजार रुपये जुर्माना भरना होगा। साथ ही स्वत: कर निर्धारण से भी बाहर हो जाएंगे।