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तेज की जाएगी ‘घर वापसी’ की मुहिम

Sat, 17 Jan 2015 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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‘घर वापसी’ सहित विश्व हिन्दू परिषद के चारों प्रस्तावों को संतों ने सहमति दे दी है।  संतों की मुहर के बाद उम्मीद है कि विहिप की यह मुहिम तेज होगी। संतों ने दो टूक कहा कि धर्मांतरण को लेकर चाहे जैसे विवाद हों, इसे रोका नहीं जाएगा। समाज के बिछुड़े और भूलेभटके लोगों को घर वापस लाने के अभियान को और गति दी जाएगी। साथ ही मंदिर निर्माण को लेकर कदम पीछे न हटाने का भी ऐलान किया गया। इसी क्रम में गौरक्षा और निर्मल गंगा मुहिम को भी धार देने का फैसला हुआ।
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माघ मेले में त्रिवेणी रोड स्थित शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के शिविर में शनिवार को हुए संत सम्मेलन में विहिप के केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों, राम मंदिर निर्माण, धर्मांतरण, गौरक्षा और निर्मल गंगा पर चर्चा के बाद संतों ने मुहर लगा दी। माध्वाचार्य विद्यमातीर्थ समेत कई संतों ने धर्मांतरण पर विहिप के प्रस्ताव का समर्थन किया।

शंकराचार्य के शिविर में जुटे संतों के बीच राम जन्मभूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने सपा पर हिन्दू समाज को तोड़ने और इसे लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। कहा, बिछड़े-भटके बंधुओं की घर वापसी पर यूपी सरकार राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती है।  उन्होंने राम मंदिर निर्माण को हिन्दुओं का सपना बताया। कहा, इसमें कोई अवरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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बतौर अध्यक्ष शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि न्यास समिति के मॉडल के अनुरूप पत्थर तराशे गए हैं। उन्हीं पत्थरों से उसी मॉडल के अनुरूप सरकार मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। काशी सुमेरूपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने मांस बिक्री और गौहत्या पर फौरन रोक लगाने की मांग की।  
निरंजनी अखाड़े के सचिव और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि ने अविरल और निर्मल गंगा के लिए केंद्र सरकार से प्रभावी कानून बनाने की मांग की। उन्होंने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और संत समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने का भी आह्वान किया। सम्मेलन में रामानुज, प्रेमदास, विवेकानंद सरस्वती, सच्चा आश्रम के परमदास स्वामी गोपालदास, कर्नाटक के नृसिंहा महराज आदि भी शामिल थे।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंहल संत सम्मेलन में नहीं पहुंच सके। यह पहला मौका है जबकि वह संत सम्मेलन का हिस्सा नहीं रहे। स्वास्थ्य कारणों और कड़कड़ाती ठंड से वह शुक्रवार को हुए मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में भी नहीं पहुंचे थे। काशी प्रांत के संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक वह दिल्ली से ही यहां नहीं आ सके।
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