चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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शराब के पैसे न मिलने पर पत्नी और बेटी की हत्या करने वाले मैनपुरी कटहल के सोबरन सिंह प्रजापति की फांसी की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त का अपराध रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी का है। इसमें आजीवन कारावास की सजा पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने सत्र न्यायालय मैनपुर के फैसले को उचित करार दिया है। सोबरन की अपील और फांसी की सजा के रेफरेंस पर एक साथ सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
सोबरन सिंह की शादी 15 साल पहले ममता के साथ हुई थी। उसके पांच बच्चे थे। 30 जून 2014 को सोबरन ने शराब पीने के लिए ममता से पैसे मांगे। पैसे देने से इंकार करने पर उसने ममता को पत्थर और डंडे से पीट-पीट कर मार डाला। उस वक्त घटना स्थल मौजूद बड़ी बेटी 12 वर्षीय सपना को भी उसने जमीन पर कई बार उठा-उठाकर पटका और इसके बाद उसकी गर्दन पर पैर रखकर दम निकलने तक दबाए रखा।
नगला पाजवा निवासी ममता के ममेरे भाई ने घटना की प्राथमिकी दर्ज कराई। पत्नी बेटी की हत्या के बाद सोबरन फरार हो गया था। 17 अगस्त 2014 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सोबरन के बच्चों की गवाही पर सत्र न्यायालय ने एक जनवरी 2017 को उसे फांसी और जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई।
कोर्ट ने जुर्माने की सजा यह कहते हुए माफ कर दी कि फांसी के बाद जुर्माने का कोई औचित्य नहीं है। मगर सोबरन के अपराध को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए कहा कि आम तौर पर हत्या के लिए उम्रकैद की सजा दी जाती है। फांसी की सजा विशेष स्थिति में ही दी जाती है। यह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है कि वह अपराध की गंभीरता के अनुसार निर्णय ले। इस मामले में आरोपी ने न सिर्फ अपनी की बेरहमी से हत्या की बल्कि नाबालिग बेटी के गले पर पैर रखकर उसके मरने तक दबाए रखा। अभियुक्त का कृत्य अत्यधिक बर्बरतापूर्ण है। हत्या के बाद वह फरार रहा जिससे परिवार के अन्य सदस्यों की जान पर खतरा बना हुआ था। इस मामले में उम्रकैद की सजा देने से न्याय नहीं मिलेगा।