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पढ़ाई के दौरान खोली कंपनी, दूसरों को भी दिखाई राह

Sun, 05 Mar 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में शनिवार को ऐसे उत्साही युवाआें का जमावड़ा हुआ जिन्होंने पढ़ाई के दौरान या डिग्री हासिल करने के बाद एक-दो साल के भीतर न सिर्फ कंपनी खोल ली बल्कि सफलता के नए आयाम भी स्थापित किए। संस्थान के डिजाइन एंड इनोवेशन सेंटर में आयोजित इंटरप्रिन्योरशिप समिट में स्टार्ट अप शुरू करने वाले ऐसे ही युवाओं ने अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को भी उद्यमिता की राह दिखाई।
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कार्यक्रम में होली आईक्यू डाट कॉम के सीईअओर हरि नायर, दीपक गोयल, अमरजीत गुप्ता आदि उद्यमियों ने कंपनी खोलने और सफलता के सफर पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्हाेंने विद्यार्थियों को सवालों के जवाब भी दिए। इससे पहले उद्घाटन कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर एमएम गोरे ने किया। उन्होंने कहा कि टेकभनोक्रेट्स अब नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे। सेंटर के चेयरमैन प्रोफेसर अनुज जैन ने कहा कि केंद्र सरकार की स्टार्ट अप योजना का असर दिखने लगा है। युवाओं की सोच में बदलाव आया है और वे खुद की कंपनी खोलने के लिए तैयार हैं। डॉ.तनुज नंदन ने कहा कि स्टार्ट अप इंडिया से रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

संस्थान से ही 2012 में बीटेक करने वाले मुकुंद गुप्ता ने कालेज रूम से उद्यमिका के क्षेत्र में कदम रखा और और आज एक सफल उद्यमी हैं। मूलत: कानपुर के मुकुंद ने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने वाहनों पर प्रचार का काम शुरू किया। इसमें उनका साथ कालेज के साथी राहुल रंजन श्रीवास्तव ने भी दिया। हालांकि राहुल ने बाद में नौकरी पकड़ ली लेकिन मुकुंद ने इसी काम को विस्तार दिया। कानपुर के मुकुंद ने बताया कि इसकी शुरुआत 20 हजार रुपये से हुई थी लेकिन उनकी संस्था पैरामांउट इवेंट्स एंड मार्केटिंग का लगातार विस्तार होता गया। वर्ष 2016-17 वर्ष में एक करोड़ रुपये का टर्नओवर हुआ। उन्होंने बताया कि  संस्था के पास उत्तर प्रदेश और एनसीआर के 15 जिलों में काम है। कंपनी में सात लोग सहयोगी के रूप में कार्यरत हैं। समय-समय पर अस्थाई तौर पर भी लोग रखे जाते हैं।
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संस्थान के बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र मनु निगोतिया (कम्प्यूटर साइंस), समर्थ शुक्ला और शाकिब जावेद (सूचना प्रौद्योगिकी) खुद के साथ स्कूली बच्चों का भी कॅरियर संवार रहे हैं। उन्होंने स्कूलों में इवेंट प्रोग्राम कराने के क्षेत्र में कदम रखा है। इस मकसद से उन्होंने ‘क्यूरियस-यू’ नामक संस्था बनाई है। तीनों छात्र महर्षि पतंजलि, आर्मी पब्लिक स्कूल, मेरी लूकस, ब्वॉयज हाईस्कूल समेत शहर के आधा दर्जन से अधिक स्कूलों में क्विज, मॉडल यूनाइटेड नेशन, मॉडल पार्लियामेंट, काउंसलिंग, आदि कार्यक्रम करा चुके हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं, स्किल डेवलपमेंट, वाद-विवाद प्रतियोगिता आदि को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं, जिसका अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। इसके लिए वे न्यूनतम फीस लेते हैं। छात्राें का कहना है कि आमतौर पर स्कूलों में पढ़ाई में अव्वल रहने वाले विद्यार्थियों को ही हर जगह आगे बढ़ाया जाता है लेकिन वे इस धारणा को तोड़ना चाहते हैं। वे बच्चों को बताते हैं कि हर किसी में मेधा होती है। बस उसे जानने और निखारने की जरूरत होती है।
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गुरु मंत्र
0 खुद के भीतर की उद्यमिता को आगे बढ़ाने की है जरूरत
0 सफलता के लिए समर्पण और लगन की होती है जरूरत
0 सेवा समेत कई क्षेत्रों में पूंजी नहीं शुरुआत की होती है जरूरत
0 खुद के काम के लिए बीटेक, एमबीए जरूरी नहीं, कोई भी कर सकता है शुरुआत
0 तत्काल नहीं मिलेगी सफलता, कम से कम तीन-चार साल दिखाना होगा धैर्य
0 काम की जरूरत को देखते हुए प्रशिक्षण प्राप्त कर करना होता है खुद को अपग्रेड
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