कोरांव और मेजा की पहाड़ियों में गुम हो रहे काले हिरनों के भी अच्छे दिन आएंगे। अमर उजाला ने ‘कोरांव से गुम हो गए काले हिरन’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद प्रशासन ने उनके संरक्षण की पहल की। काले हिरनों के लिए गर्मी के दिनों में पानी की व्यवस्था रहे, इसके लिए पहाड़ी क्षेत्र में सोलर पंप और छोटे-छोटे तालाब बनाए जाएंगे। साथ ही काले हिरनों के लिए विख्यात यमुनापार के चांद खमरिया और गड़री गांव के काया पलट की भी तैयारी है। शनिवार को एसडीएम ने इन गांवों तक पहुंचने के लिए रास्ते का मौका मुआयना किया। जल्द ही सड़क निर्माण शुरू कराने की योजना है। चांद खमरिया और गड़री की पहाड़ी को पिकनिक स्पॉट के तौर पर भी विकसित करने की योजना है।
कोरांव और मेजा क्षेत्र के सटे गांव चांद खमरिया और गड़री में काले हिरनों ने एक दशक से डेरा जमा रखा है। पानी की तलाश में यहां ये आ गए और फिर लौटे नहीं। शिकारियों और कुत्तों से बचाने के लिए ग्रामीणों ने भी हिरनों को सुरक्षा भी दी, लेकिन शिकार में कमी नहीं आई। काले हिरन लुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम संजय कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया। उनकी पहल पर अब इन गांवों के काया पलट की तैयारी है।
तालाब भरने के लिए क्षेत्र में सोलर पंप लगवाए जाएंगे। वन विभाग की जमीन पर काले हिरनों को सुरक्षित करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। मौजूदा समय में सबसे ज्यादा समस्या आवागमन को लेकर है। ऐसे में शनिवार को कोरांव एसडीएम कुलदेव सिंह और नायब तहसीलदार रामानुज शुक्ला चांद खमरिया गांव पहुंचे। वहां सड़क बनाने के लिए जमीन का मौका मुआयना किया। एसडीएम ने बताया कि पहले पट्टे पर दी गई जमीनों को अधिग्रहीत किया जाएगा। जल्द ही सड़क निर्माण का काम पूरा होगा।