पत्नी-बच्चों की हत्या के बाद सीआरपीएफ जवान की खुदकुशी में प्रयुक्त असलहे के बारे में रहस्य देर रात तक बना रहा। दरअसल मृतक के परिवारवालों का कहना है कि उसके पास लाइसेंस नहीं था। उधर पुलिस असलहे को लाइसेंसी बताती रही लेकिन वह देर रात तक लाइसेंस बरामद नहीं कर सकी थी।
वारदात की सूचना पर पहुंची पुलिस को मौके से ही एक रिवॉल्वर बरामद हुआ। यह फंदे पर लटके जवान के शव के पास जमीन पर पड़ा हुआ था। आशंका थी कि वारदात में सर्विस रिवॉल्वर का इस्तेमाल हुआ। हालांकि जब पुलिस ने सीआरपीएफ अफसरों से बात की तो उन्होंने इससे इंकार कर दिया। उनका कहना था कि विनोद को कोई असलहा आवंटित नहीं किया गया था।
इसके बाद पांच घंटे तक जांच पड़ताल चलती रही लेकिन पुलिस को असलहे का कोई लाइसेंस नहीं मिला। उधर जब मृतक के घरवालों से बात की गई तो उन्होंने विनोद के पास असलहा लाइसेंस होने की जानकारी से इंकार कर दिया। इस मामले में सीओ उमेश शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आशंका यही है कि बरामद असलहा लाइसेंसी है। लाइसेंस के बाबत उनका कहना है कि फिलहाल तो यह बरामद नहीं हुआ है।
परिवार में कोई बचा नहीं है, ऐसे में इसके बारे में कोई बताने वाला भी नहीं है। उधर थरवई एसओ भुवनेश चौबे ने बताया कि असलहा कानपुर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में निर्मित है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह लाइसेंसी ही है। हालांकि अब तक लाइसेंस बरामद नहीं हो सका है। जांच पड़ताल की जा रही है।