साधुओं के लिए 9500 रुपये की लागत से बनाया था नावों से बना पुल
कुंभ के दौरान व्यवस्था बनाना हमेशा से प्रशासनिक अफसरों के लिए गंभीर चुनौती रही है। यहां प्रदर्शित एक दस्तावेज से वर्ष 1894 कुंभ के दौरान पेश आने वाली दिक्कतों का पता चलता है। तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं प्रभारी एचडब्ल्यू पाइक की ओर से बनाए गए कार्यादेश में बताया गया है कि इस वर्ष गंगा की धारा झूंसी से बदलकर किले की तरफ हो गई है। इस वजह से साधुओं को संगम तक पहुंचाने के लिए नावों का पुल तैयार कराया गया। इस पुल की लागत 9500 आंकी गई। गंगा का प्रवाह बदलने से मेला प्रशासन को कुल 15700 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ गए।