फोटो कैप्शन: मांडा महेवा कला में धनुषयज्ञ और श्रीराम विवाह की लीला का मंचन करते कलाकार।
झुकी जैयो तनकी, रघुवीर लली मोरी छोटी सी, आप बड़े बलवीर, लली मोरी छोटी सी'''''''' जैसे मंगलगीतों के बीच महेवा कला गांव में चल रही 111वें वर्ष की रामलीला में बुधवार रात श्रीराम विवाह की लीला का मनोहारी मंचन किया गया। शिव धनुष भंग से लेकर श्रीराम-सीता विवाह तक के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। जय श्रीराम के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।
मंचन के दौरान बंदीजनों ने राजा जनक की प्रतिज्ञा सुनाते हुए कहा कि जो वीर शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में मौजूद राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन सभी असफल रहे। इससे राजा जनक व्यथित हो उठे और वीरों की क्षमता पर सवाल उठाने लगे।
इस पर लक्ष्मण ने विरोध जताया। गुरु विश्वामित्र के निर्देश पर प्रभु श्रीराम धनुष की ओर बढ़े तो उनके कोमल स्वरूप को देखकर रानी सुनयना व्याकुल हो उठीं। सीता भी गौरी देवी सहित देवी-देवताओं से प्रार्थना करने लगीं कि धनुष का भार हल्का हो जाए।
प्रभु श्रीराम ने सहजता से शिव धनुष तोड़कर राजा जनक की चिंता दूर कर दी। धनुष टूटने की आवाज सुनकर क्रोधित परशुराम सभा में पहुंच गए। उन्हें देखकर वहां मौजूद राजा भयभीत हो उठे। परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखा संवाद हुआ। बाद में प्रभु श्रीराम के वास्तविक स्वरूप का बोध होने पर परशुराम ने अपनी भूल स्वीकार की और श्रीराम का जयकारा लगाया। इसके बाद श्रीराम और सीता के विवाह का मंचन हुआ।
रामलीला में दुष्टराजा-साधुराजा संवाद, रावण-वाणासुर संवाद, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और पेटहवा राजा के हास्य प्रसंग ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। श्रीराम के रूप में सुंदरम, लक्ष्मण-करन, सीता-अंकित, रावण-अश्वनी श्रीवास्तव, वाणासुर-आशीष श्रीवास्तव और दुष्टराजा के रूप में सार्थक के अभिनय को दर्शकों ने सराहा। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थाना प्रभारी कुलदीप शर्मा ने मंच पर पहुंचकर प्रभु श्रीराम की आरती उतारी और कलाकारों को उपहार देकर उनका उत्साहवर्धन किया।
फोटो कैप्शन: मांडा महेवा कला में धनुषयज्ञ और श्रीराम विवाह की लीला का मंचन करते कलाकार।