प्रदेश के कानून राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी ने शनिवार को एक मुकदमे में स्पेशल कोर्ट में हाजिरी के दौरान एक मिसाल पेश की। वह खुद कोर्ट में बने कठघरे में जाकर खडे़ हो गए। चूंकि कानून मंत्री उस मुकदमे में आरोपी के तौर पर हाजिर हुए थे, इसलिए उन्होंने कानूनी प्रावधानों का पालन किया।
कोर्ट ने नीलकंठ तिवारी के अलावा अन्य सहअभियुक्तों के उपस्थित न होने पर गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने दिया है। प्रकरण वाराणसी के कैंट थाने का है। आरोप है कि छात्रसंघ चुनाव के नामांकन जुलूस में नीलकंठ ने दूसरे पक्ष के छात्रों के साथ मारपीट कर बैनर आदि फाडे़ थे। पुलिस ने इस मामले में नीलकंठ तिवारी, शैलेंद्र कुमार, नीरज सिंह, राजन सिंह संदीप राय और शरद चंद वाजपेयी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
आचार संहिता उल्लंघन के मामले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने शनिवार को स्पेशल कोर्ट (एमपी/एमएलए) में आत्मसमर्पण किया और जमानत अर्जी प्रस्तुत की। वह करीब तीन घंटे न्यायिक अभिरक्षा में रहे। कोर्ट ने सुनवाई के बाद 20-20 हजार की दो जमानतें और व्यक्तिगत मुचलका दाखिल करने पर उनको रिहा कर दिया।
जमानत अर्जी पर स्पेशल कोर्ट जज पवन कुमार तिवारी ने सुनवाई की। घटना पांच अप्रैल 2014 की गाजियाबाद के निवाड़ी थाने की है। वादी कार्यकारी मजिस्ट्रेट उड़नदस्ता भूपेश कुमार सुहेरा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सत्यपाल सिंह बिना अनुमति के गांव में चुनावी मीटिंग कर रहे थे। इनके खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप है। जमानत अर्जी में कहा गया कि वह आरोपपत्र में नामजद नहीं हैं। उनका नाम सत्यपाल मलिक या चौधरी नहीं है। वह डॉ. सत्यपाल सिंह हैं और बागपत के भाजपा सांसद हैं। कोर्ट ने जमानतीय अपराध होने के कारण उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली। उन्हें बंधपत्र और मुचलका दाखिल करने पर रिहा कर दिया।
आचार संहिता उल्लंघन के एक मुकदमे में उपस्थित न होने पर स्पेशल कोर्ट ने पूर्व मंत्री नारद राय और नागेंद्र पांडेय के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किए जाने का आदेश दिया है। प्रकरण की सुनवाई दस जनवरी 2019 को होगी। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने दिया है। घटना एक फरवरी 2012 की बलिया के कोतवाली थाने की है। आरोप है कि एक टीवी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ के दौरान नारद राय आदि ने शांतिभंग कर आचार संहिता का उल्लंघन किया था।