इलाहाबाद (ब्यूरो)। शहीद चंद्रशेखर आजाद की बृहस्पतिवार को जयंती मनाई गई। जगह-जगह कार्यक्रम हुए। लोगों ने उनकी शहादत को याद किया। चंद्रशेखर आजाद पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी और अपने घरों को लौट गए, लेकिन नगर निगम के स्टोर में कैद आजाद की प्रतिमा की याद उन्हें नहीं आई। यह दुर्भाग्य ही है कि जिस आजाद से अंग्रेज भी थर्राते थे, नगर निगम और प्रशासन की उदासीनता के कारण उनकी प्रतिमा 10 वर्ष से नगर निगम के कबाड़खाने में एक किनारे पड़ी है।
प्रतिमा को सर्किट हाउस या किसी अन्य प्रमुख स्थान पर लगाने की मांग काफी समय से हो रही है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा की दुर्दशा पर ‘अमर उजाला’ के बृहस्पतिवार के अंक में खबर प्रकाशित हुई तो नगर निगम के इतना किया कि स्टोर में जहां आजाद की प्रतिमा रखी है, उसके आसपास सफाई कराके चूना का छिड़काव करा दिया और हरे रंग का कपड़ा मंगाकर प्रतिमा के ऊपर डलवा दिया।
ऐसा नहीं है कि प्रतिमा लगवाने की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगम की है। वर्ष 2005 में तत्कालीन डीएम अमृत अभिजात ने यह प्रतिमा मंगाई थी। उसे सर्किट हाउस में लगाया जाना था, लेकिन किन्हीं कारणों से प्रतिमा नहीं लगी तो उसे पहले नगर निगम के इंडियन प्रेस चौराहा स्थित स्टोर और उसके बाद करीब सात माह पहले निगम मुख्यालय के स्टोर में रखवा दिया। इस बीच जिला प्रशासन ने एक बार भी प्रतिमा लगवाने के बारे में निगम प्रशासन से संपर्क नहीं किया।
भाजपा पार्षदों ने आजाद की प्रतिमा सर्किट हाउस में लगाने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को नगर निगम में प्रदर्शन किया। पार्षद किरन जायसवाल के नेतृत्व में आजाद पार्क में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपकर प्रतिमा स्थापित कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पार्षदों ने प्रतिमा सर्किट हाउस में लगवाने का प्रण किया। इसमें गिरिशंकर प्रभाकर, किरन जायसवाल, सोनिका अग्रवाल, सत्येंद्र चोपड़ा, भोला तिवारी, आनंद सिंह, संजय गुप्ता, बब्लू सोनकर, पुष्पा कुशवाहा, प्रमोद जायसवाल, सीताराम, सत्येंद्र चोपड़ा आदि शामिल थे। इसके बाद किरन जायसवाल के नेतृत्व में पार्षदों एवं अन्य लोगों ने आजाद पार्क में राज्यपाल श्री त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपकर आजाद को अपमानित करने का आरोप लगाया। साथ ही प्रतिमा स्थापित कराने की मांग की गई।
चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा नगर निगम के तुलसी पार्क में लगाने की योजना बनाई जा रही है। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी का कहना है कि जल्द ही इस संबंध में नगर आयुक्त से वार्ता की जाएगी। इसके बाद पार्क में उचित स्थान पर प्रतिमा स्थापित कराई जाएगी।
कभी नगर निगम परिसर में फौव्वारे के साथ लगी अष्टधातु की बेशकीमती प्रतिमाओं को लेकर अफसरों की नियत साफ नहीं लग रही। तकरीबन 40 वर्ष पहले इन प्रतिमाओं को हटा दिया गया था। पिछले चार वर्ष पहले पता चला था कि बहुमूल्य प्रतिमाएं निगम के गार्डरूम में रखी हैं तो तत्कालीन महापौर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह ने उसे निगम परिसर के गार्डेन में लगाने का आदेश दिया। निगम सदन में भी इस पर फैसला लिया गया, लेकिन प्रतिमाएं आज तक नहीं लगाई गई। बाद में महापौर ने प्रतिमाओं को सरकारी दस्तावेज में दर्ज कर स्टोर में रखवाने का भी आदेश दिया, लेकिन उसका भी पालन नहीं हुआ। सूत्रों की मानें को कुछ अफसर प्रतिमा को गायब कराने की फिराक में हैं। इसलिए लंबे समय बाद भी उसे गार्ड रूम से नहीं हटाया गया।