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High Court : मूंढापांडे में गोलीबारी के क्या है सुबूत, पेश करें, जानलेवा हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक

Sun, 10 May 2026 05:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहासुनी के दौरान जानलेवा हमले मामले में एक ही परिवार के चार आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से पूछा है कि घटनास्थल पर गोलीबारी के कौन से सुबूत उपलब्ध हैं।
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अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी आरोपियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहासुनी के दौरान जानलेवा हमले मामले में एक ही परिवार के चार आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से पूछा है कि घटनास्थल पर गोलीबारी के कौन से सुबूत उपलब्ध हैं।

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यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अब्दुल वसीम, उनके बेटे और पत्नी की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। मामला मुरादाबाद जिले के मूढ़ापांडे थाना क्षेत्र से जुड़ा है। राजेंद्र सिंह की ओर से दर्ज एफआईआर में आरोप है कि आरोपियों ने जमीन पर साफ सफाई के दौरान उन पर जानलेवा हमला किया और जाति सूचक शब्दों से अपमानित किया।

गिरफ्तारी से बचने के लिए सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों पर लगे आरोप निराधार है। रिकॉर्ड पर ऐसा की सुबूत उपलब्ध नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि गोलीबारी हुई हो।
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कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता से एक सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया है कि क्या घटनास्थल पर गोलीबारी के कोई स्पष्ट निशान मिले हैं। यदि गोलीबारी से संबंधित कोई भी ठोस सामग्री उपलब्ध है, तो उसे कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए।

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