फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के गुलचपा गांव के सामने चांदोपारा संपर्क मार्ग के किनारे सरपत की झाड़ी में सोमवार दोपहर करीब 1.30 बजे मासूम बच्चे के रोने की आवाज वहां भेड़ चरा रहे चरवाहों ने सुनी तो भागकर मौके पर पहुंचे, जहां करीब दो घंटे पहले ही जन्मी एक मासूम बच्ची दिखी।
आखिर मेरा का क्या कुसूर था जो सड़क किनारे सरपत की झाड़ी में मुझे मरने के लिए छोड़ दिया गया। यह दर्द उस अनबोली बिटिया का है जो अभी दो घंटे पहले ही जन्मी है। सोमवार को सड़क किनारे एक झाड़ी में पड़ी मिली। रोने की आवाज सुन भेड़ चरा रहे लोग वहां पहुंचे तो ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। पड़ोस के गांव की एक महिला ने उसे अपनी गोद में उठाया और साफ-सफाई कर दूध पिलाया।
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फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के गुलचपा गांव के सामने चांदोपारा संपर्क मार्ग के किनारे सरपत की झाड़ी में सोमवार दोपहर करीब 1.30 बजे मासूम बच्चे के रोने की आवाज वहां भेड़ चरा रहे चरवाहों ने सुनी तो भागकर मौके पर पहुंचे, जहां करीब दो घंटे पहले ही जन्मी एक मासूम बच्ची दिखी। फिर क्या था यह बात जंगल में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों की सूचना पर फूलपुर पुलिस भी मौकेे पर पहुंची।
इसी बीच वहां पड़ोस के गांव बरईतारा के रहने वाले सुनील अपनी पत्नी के साथ पहुंचे और मासूम बिटिया को अपनाने की बात कही। फिलहाल पुलिस मासूम बिटिया को चाइल्ड केयर सेंटर के हवाले कर दिया। इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार गौतम ने बताया कि बरईतारा गांव निवासी दंपती भी चाइल्ड केयर सेंटर बच्चे के साथ गए हैं, आगे की कार्रवाई चाइल्ड केयर सेंटर के अधिकारी करेंगे।