नवसंवतसर सौम्य का शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ स्वागत हुआ। लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी। सोशल मीडिया के माध्यम से भी संवतसर की बधाई दी गई। विभिन्न संगठनों की ओर से संगम सहित गंगा के विभिन्न तटों पर सूर्योदय होते ही घंटा-घड़ियाल, शंखनाद के साथ आरती की।
प्रयागराज सेवा समिति, प्रधान त्रिवेणी आरती समिति की ओर से संगम तट पर नवसंवतसर का स्वागत समारोह आयोजित हुआ। माधव और मां गंगा का विधिविधान से पूजा और बहुपात्रों से महाआरती की गई। समिति अध्यक्ष धर्मराज पांडेय, भोलानाथ मिश्रा, एपी पांडेय, बृजेश मिश्रा, तीर्थराज पांडेय ने शंखनाद कर उपस्थित लोगों को तिलक लगाकर बधाई दी। तीर्थराज पांडेय ने कहा कि युवाओं को वैदिक परंपराओं से अवगत कराने का अभियान संस्था की ओर से चलाया जाएगा। इसके लिए वर्ष भर गोष्ठी, कार्यशाला, पोस्टर अभियान चलाया जाएगा।
समिति सदस्यों ने मंदिरों, शिक्षण संस्थाओं में जाकर संवतसर की बधाई दी गई। शाम को हुई सभा में संरक्षक ध्रुवराज पांडेय ने सौम्य संवतसर के बारे में बताया। स्वागत और आभार केसी पाण्डेय ने व्यक्त किया। इस अवसर पर भक्तराज पांडेय, आशा पांडेय, गुरुदयाल श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
हरिहर आरती समिति की ओर से रामघाट पर आरती की गई। भजन संध्या में गंगा महिमा का गुणगान करने वाले भजन कीर्तन हुए। कार्यक्रम में अध्यक्ष सुरेश चंद्रा, अवधेश चंद्र गुप्ता, संजय कुमार नरेंद्र कुमार मौर्य आदि उपस्थित रहे।
ज्ञान ज्योति अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की ओर से शंकराचार्य आश्रम अलोपीबाग में काव्यगोष्ठी हुई। महामंत्री विजय कुमार मिश्र की देखरेख में हुए आयोजन में संस्था के सदस्यों ने एक-दूसरे का नवसंवतसर की बधाई दी।
भारत विकास परिषद एवं राष्ट्रीय युवा क्रांतिकारी मोर्चा की ओर से सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर के प्रवेशद्वार पर नवसंवतसर का स्वागत किया गया। संरक्षक श्याम सुंदर अग्रवाल ने लोगों को चंदन का तिलक लगाया मिठाई खिलार्द और बधाई दी। संचालन अतुल खन्ना ने किया।
श्री नव संवत्सर मानस समिति की ओर से कल्याणी देवी मंदिर परिसर में श्री रामकथा हुई। कथा व्यास डा. रामकल दास वेदांती ने रामकथा के कई प्रसंगों को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया। संयोजक सुशील पाठक, महामंत्री पुनीत वर्मा की देखरेख में आयोजित रामकथा को सुनने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा। जय श्रीराम के घोष से कथा स्थल गूंजता रहा।
काशीराजनगर बलुआघाट स्थित इस्कान मंदिर में रामकथा का आयोजन हुआ। कथावाचक रामानुजदास ने कथा सुनाई। इस मौके पर मंदिर के अध्यक्ष आचार्यदास, आशुतोष दास, पूर्णकांत दास आदि उपस्थित रहे।