उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकाें में जारी बर्फबारी व पछुवा-पुरवइया के गठजोड़ से मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगाड़ दिया है। मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते पिछले चौबीस घंटे में शहर व आसपास के इलाकों में 1.2 मिमी बारिश हुई। रही सही कसर ठंडी पछुवा हवाओं ने पूरी कर दी। बारिश का सिलसिला सुबह से शुरू हो गया। बारिश व ठंडी हवाओं का असर पारे पर भी दिखायी दिया। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को अधिकतम तापमान 20.2 डिग्री व न्यूनतम 12.8 डिग्री दर्ज किया गया। बारिश के चलते अधिकतम और न्यूनतम आर्द्रता का अंतर बेहद कम हो गया। अधिकतम आर्द्रता 97 और न्यूनतम 83 फीसदी दर्ज की गई। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा का कहना है कि पश्चिम की ठंडी हवाआें व पूर्व की नम हवाओं के गठजोड़ ने बादल का रूप ले लिया है। डॉ. ओझा के मुताबिक सोमवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। बूंदाबांदी की भी संभावना है।
मौसम के बदले मिजाज के चलते हुई बारिश व ठंड का शहरियों ने अपने अंदाज में आनंद लिया। नौकरीशुदा शहरियों ने रविवार को अवकाश होने के चलते बारिश व ठंड का जमकर लुफ्त उठाया। घर में चाय की चुस्की व पकौड़े के साथ बारिश का लुफ्त लिया। देर रात सिविल लाइंस में भी शहरियों ने चहल कदमी कर आनंद लिया।
हल्की बारिश व ठंड हवाओं ने बेशक मौसम का मिजाज बिगाड़ दिया हो लेकिन किसानों के लिए फायदेमंद व नुकसानदेह दोनों साबित हो रही है। कुलभाष्कर आश्रम महाविद्यालय के प्राचार्य एवं कृषि विज्ञानी डॉ. ज्योति शंकर के मुताबिक हल्की बारिश गेंहृ की फसल के लिए तो फायदेमंद है लेकिन सरसों, चना, मसूर व पछेती आलू के लिए नुकसानदेह है। उल्लेखनीय है कि जिले में 13 हजार हेक्टेयर मेें मसूर, 16 हजार हेक्टेयर में चना व 12 हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल बोई गई है। इन सभी दलहनी फसलों के लिए बारिश नुकसानदायक है। बारिश के चलते पछेती प्रजाति केआलू पर ‘ब्लाइट आफ पौटेटो’ बीमारी का खतरा है।