हिमालयी इलाकों से चलकर गंगा के मैदानी इलाकाें में पहुंची ठंडी पछुवा खतरनाक हो चली है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम पुरवइया और पछुवा के गठजोड़ से बने कोहरे और बादलों ने ठंड को बुधवार को खतरनाक बना दिया है। ठंड के चलते देहात क्षेत्र में कई लोगों की मौत हो गई, वहीं माघ मेला क्षेत्र में शाम छह बजे तक 2707 कल्पवासियों, स्नानार्थियाें की हालत बिगड़ गई। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के मुताबिक 30 लोगों को को मेला अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जबकि आधा दर्जन गंभीर मरीजों को एसआरएन रेफर कर दिया गया। मेला प्रशासन की ओर से बेहद कम अलाव जलाए जा रहे हैं। मेला प्रशासन की ओर से जिन स्थानों पर अलाव जलाए गए थे वहां भीड़ लगी रही।
बुधवार को पारा अचानक काफी खिसक गया। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को अधिकतम तापमान 12.3 डिग्री और न्यूनतम पांच डिग्री पर पहुंच गया जो एक दिन पूर्व 13.5 और 8.9 डिग्री था। ऐसे में न्यूनतम तापमान में 3.9 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा के मुताबिक ठंडी पछुवा के गंगा के मैदानी इलाकों में ठहर जाने से स्थिति खतरनाक हो गई है।
संगम में स्नान करने पहुंचे स्नानार्थियों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तो बेरहम मौसम और दूसरी ओर खाली पेट कई किलोमीटर पैदल चलना। कई स्नानार्थियों को कोल्ड स्ट्रोक का अटैक पड़ा। वहीं हजारों बेसुध होकर गिर गए, जिन्हें परिजनों और साथ चलने वालों ने संभाला। चिकित्सा विशेषज्ञों ने राय दी है कि खाली पेट कई किमी पैदल कतई न चलें।
लाखों की तादात में स्नानार्थियों के माघ मेला क्षेत्र पहुंचने और हजारों की तबियत खराब होने की घटनाओं ने एंबुलेंसकर्मियों का काम बढ़ा दिया। आलम यह रहा है कि माघ मेला क्षेत्र में एंबुलेंस चौबीसों घंटे भागती रहीं। एंबुलेंस की संख्या कम होने की वजह से भी दिक्कत हुई।
घने कोहरे के चलते शहर की सड़कों व माघ मेला क्षेत्र में दृश्यता बेहद कम रही। ऐसे में जहां वाहन चालकाें को दिक्कत हुई वहीं मेला क्षेत्र में नावों का संचालन सुबह नौ बजे तक ठप रहा। मेला क्षेत्र में स्थिति यह रही कि किसी को भी एक मीटर के आगे कुछ दिखायी ही नहीं दे रहा था।