यह ठंड का असर रहा हो या मकर संक्रांति के स्नान को लेकर उहापोह। इलाहाबाद जंक्शन, प्रयाग और रामबाग स्टेशनों से मकर संक्रांति की भीड़ नहीं दिखी। सरकुलेटिंग एरिया से लेकर फुटओवर ब्रिज, प्लेटफार्म और टिकट घर तक हर कहीं सामान्य दिनों जैसा ही दिखा। ट्रेनें आईं, यात्री उतरे और चंद मिनटों में प्लेटफार्म खाली हो गए। भीड़ पहुंचने का अनुमान लगाकर डीआरएम, एडीआरएम और सीनियर डीसीएम दोपहर तक प्लेटफार्म पर डटे रहे लेकिन सन्नाटा देख वह भी वापस हो गए। साथ ही सिविल लाइंस साइड में नवाब यूसुफ रोड से घेरेबंदी के बाद भी पैदल लोगों को प्रवेश से ज्यादा रोकटोक नहीं की गई। उधर, बस अड्डे पर अपराह्न दो बजे के आसपास 100 यात्री बमुश्किल नजर आए। एक बस को भरने में 20-25 मिनट का वक्त लग रहा था। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक सुमन कुमार ने दावा किया कि यात्रियों की संख्या कम होने के कारण रूटीन की बसों का संचालन भी नहीं किया जा सका।
मकर संक्रांति पर संगम में स्नान करने वालों की भीड़ का अनुमान था लेकिन ठंड ने यात्रियों के छक्के छुड़ा दिए। पहले दिन उम्मीद से बेहद कम स्नानार्थी रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर दिखाई दिए। अनुमान था कि शाम चार बजे के बाद भीड़ बढ़ सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्टेशन पर रोजाना की तरह ही ट्रेनों का संचालन होता रहा। पूरी तैयारी के बाद भी जंक्शन से एक भी स्पेशल ट्रेन चलाने की नौबत नहीं आई। प्रयाग से निरस्त की गई ट्रेनों को ही रूटीन की तरह स्पेशल बनाकर चलाया गया। यात्रियों की स्थिति का अंदाजा इससे भी लग सकता है कि सुबह आठ से शाम चार बजे के बीच केवल 826 टिकट ही बिके। यह सामान्य दिनों से भी कम है। स्टेशन अधीक्षक पीके मणि त्रिपाठी ने बताया कि स्पेशल रेक खड़े हैं लेकिन इन्हें चलाने की जरूरत नहीं पड़ी।