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ठंड हुई प्रचंड, ‘एयर ड्रैनेज’ से पारा फिर धड़ाम

Sun, 11 Jan 2015 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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पिछले कई दिनों से जारी जानलेवा शीत लहर व कोहरे  ने रविवार को और अधिक प्रचंड रूप दिखाया। राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे शहरियों को ठंड से हिलाकर रख दिया। हिमालयी इलाकोें से  लगातार आ रही पछुवा ठंडी हवाओं के चलते पारा एक बार फिर धड़ाम हो गया। ठंडी हवाओं का ही असर रहा कि अधिकतम पारा जहंा 15.3 से घटकर 12.6 डिग्री पर जा पहुंचा वहीं न्यूनतम पारा भी 6.4 से घटकर पांच डिग्री पर पहुंच गया। अधिकतम और न्यूनतम पारे में गिरावट ने ठंडक को खतरनाक बना दिया है। रही सही कसर घने कोहरे ने पूरी कर दी। मौसम का आलम यह रहा कि कोहरे की चादर में शहर पूरे दिन लिपटा रहा। हालांकि दो बजे के आसपास सूरज ने चेहरा दिखाया लेकिन कोहरे और ठंड के आगे सूरज की एक न चली। थोड़ी देर बाद मौसम का मिजाज फिर बदल गया। पिछले कई दिनों से वातावरण में व्याप्त सौ फीसदी आर्र्दता ने तीखी सर्दी को और घातक बना दिया है। जानलेवा ठंडक के चलते पिछले चौबीस घंटे के भीतर कई लोगों को जान भी गंवानी पड़ी ।  उल्लेखनीय है कि इस साल ठंड लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। जानलेवा ठंड के चलते अब तक जिले में कम से कम सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है यह वह आंकड़ा है जिसकी जानकारी मिल गई। मौतों का आंकड़ा इससे अधिक भी हो सकता है। हालांकि जिला प्रशासन ने यह तर्क देकर पल्ला झाड़ लिया है कि मौतों की वजह ठंडक नहीं वरन बीमारियां है। प्रशासन की ओर से ठंडक से होने वाली मौतों का सत्यापन कराय जा रहा है।
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मौसम विज्ञानियों के मुताबिक पिछले 24 घंटे के भीतर ठंड ने जो रौद्र रूप दिखाया है वह ‘एयर ड्रैनेज’ का नतीजा है। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा के मुताबिक उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में कई जगहों पर तामपान शून्य डिग्री तक पहुंच गया है। ऐसे में हिमालयी की ठंडी पछुवा हवाएं गंगा के मैदानों में उन इलाकाें की ओर प्रवाहित हो रही है जहां न्यूनतम तापमान पांच डिग्री के आसपास है। ठंडी हवाआें के इस प्रवाह को ही मौसम विज्ञान की भाषा में ‘एयर ड्रैनेज’ कहते हैं। रात और दिन के तापमान में कोई खास अंतर नही होने से ठंडक और खतरनाक हो चली है। ऐसा सूर्य के बेहद कमजोर होने के चलते भी हुआ है। वायुमंडल में कोहरा होने की वजह से ठंडक और खतरनाक हो चली है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मकर संक्रांति केबाद मौसम का मिजाज बदलेगा और जानलेवा ठंड से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

ठंड के प्रकोप ने माघ मेला क्षेत्र में कल्पवास कर रहे हजारों कल्पवासियों कोे भी हिलाकर रख दिया है। सुबह सुबह गंगा स्नान कर पूजा पाठ करने वाले कल्पवासी ठंडक का रौद्र रूप देखकर कांप गए हैं। ठंडक के चलते दो हजार से अधिक कल्पवासियों को इलाज कराना पड़ा है। दूसरी ओर चिकित्सा विशेषज्ञों ने कल्पवासियों को सलाह दी है कि वह खुद को ठंडक से बचाएं और मौसम का मिजाज देखकर ही गंगा स्नान करें।
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