इलाहाबाद (ब्यूरो)। शस्त्र लाइसेंस बनवाने के साथ ही रिवाल्वर या रायफल खरीदना अब आसान नही रह गया है। शस्त्र लाइसेंस बनवाने से पहले अब आवेदकों को पहले पुलिस के सामने न सिर्फ शस्त्र चलाकर दिखाना होगा वरन टेस्ट पर आने वाले खर्च का भुगतान भी करना होगा। गृह विभाग की ओर से शस्त्र लाइसेंस जारी करने के लिए नई गाइड लाइन जारी की है। नए नियम के मुताबिक अब एक शस्त्र होने के बावजूद दूसरे हथियार का लाइसेंस बनवाना उतना आसान नही रह गया है, जितना पहले था। जिलाधिकारी भवनाथ सिंह ने बताया कि अब मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी तय करेगी कि शस्त्र धारक को दूसरा लाइसेंस जारी किया जाय या नही? कमेटी में मंडलायुक्त के अलावा डीएम, डीआईजी व एसएसपी को शामिल किया गया है।
नए प्रावधानों के तहत अब यदि किसी व्यक्ति को शस्त्र लाइसेंस बनवाना है तो पहले पुलिस प्रशासन की ओर से उसका टेस्ट लिया जाएगा। टेस्ट में पास होने और पुलिस की रिपोर्ट के बाद ही लाइसेंस जारी किया है। उल्लेखनीय है कि टेस्ट पर आने वाले खर्च आवेदक द्वारा वहन किया जाएगा। इतना ही नहीं शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण के समय भी पुलिस द्वारा अब टेस्ट कराया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। नया शस्त्र लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदकोें का फिंगर प्रिंट लिया जाएगा और आधार कार्ड भी लिंक कराना अनिवार्य होगा। 65 वर्ष से अधिक आयु वाले शस्त्र धारकों को मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से चिकित्सा प्रमाण पत्र देना होगा।
आवेदन करते समय आवेदक को अपनी आर्थिक स्थिति का ब्यौरा भी देना होगा। रायफल का लाइसेंस अब जिलाधिकारी की संस्तुति पर शासन की अनुमति से ही बनेगा। नया लाइसेंस बनवाने के छह माह के भीतर हथियार न खरीदने पर लाइसेंस स्वत: निरस्त माना जाएगा।
गृह विभाग ने कारतूसों की खरीद को लेकर भी नई गाइड लाइन जारी की है। नए प्रावधानों के तहत अब लाइसेंसधारकों को 25 से अधिक कारतूस लेने के लिए डीएम की अनुमति लेनी होगी। इतना ही नहीं कारतूस खरीदते समय पहले खरीदे गए कारतूसों के खोखे जमा कराना अनिवार्य होगा।