इलाहाबाद। एक ही रसोई में आप दो या तीन कंपनियों की गैस इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपके एक से ज्यादा गैस कनेक्शनों की सब्सिडी बंद हो सकती है। तेल कंपनियों में इसे लेकर तैयारी तेज हो गई है। गैस कनेक्शन और बैंक खाता से आधार नंबर जुड़ने के बाद ग्राहकों की पहचान के लिए एनआईसी सर्वर का इस्तेमाल कंपनियां कर सकती हैं। दावा किया जा रहा है कि आधार से जुड़ने के बाद मल्टीपल गैस कनेक्शनों की जांच आसान हो जाएगी। साथ ही इससे कई कनेक्शनों के जरिए 24 से 36 सिलेंडरों पर सब्सिडी का फायदा उठा रहे लोगों की सब्सिडी रोककर केंद्र सरकार करोड़ों रुपये की बचत कर सकेगी।
करीब ढाई साल पहले सभी तेल कंपनियों ने मल्टीपल कनेक्शनों की घर-घर जांच शुरू किया था। इसमें आईओसी के 10 हजार कनेक्शन ऐसे पाए गए थे जो मल्टीपल श्रेणी में पाए गए। परंतु, सॉफ्टवेयर का अभाव में उन कनेक्शनों की जांच नहीं हो सकी जो अलग-अलग कंपनियों के थे। अभियान असफल हो गया। अफसर बताते हैं कि डीबीटीएल योजना में तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले ग्राहक संख्या एजेंसी और कंपनी की पहचान हुआ करते थे। अब 17 डिजिट की आईडी ग्राहक की स्थायी पहचान के रूप में दर्ज हो गई है। इस आईडी के जरिए सभी कंपनियों के ग्राहकों की पहचान की जा सकेगी। भारत पेट्रोलियम के बड़े अफसर दावा करते हैं कि डीबीटीएल के जरिए सरकार उन ग्राहकों की सब्सिडी बंद करना चाहती है जो कई कनेक्शनों पर सब्सिडी का फायदा ले रहे हैं। इससे बचने वाली रकम ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी सुविधा के विस्तार पर खर्च करने की योजना है।
तेल कंपनियों की नई तैयारी से भाई-भाई या पिता-पुत्र एक ही मकान में रहते हुए भी अपना कनेक्शन बचा सकते हैं और सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, उनकी रसोई अलग है, इसका शपथ पत्र देना होगा। ज्यादा दिक्कत पति-पत्नी के नाम बनवाए गए गैस कनेक्शनों पर होगी। दोनों एक रसोई में एक ही कनेक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, पति और पत्नी अलग-अलग शहरों में रहकर नौकरी करते हैं तो वह दो गैस कनेक्शन भी रख सकते हैं।
00 कनेक्शन किसी भी कंपनी का हो, मल्टीपल कनेक्शनों के मामले में एक ही कनेक्शन पर सब्सिडी का फायदा मिलेगा। पिता-पुत्र या भाई-भाई एक ही मकान में रहकर अलग-अलग गैस कनेक्शन रख सकते हैं।
यूपी सिंह
तेल कंपनियों के यूपी कोआर्डिनेटर