शाम ढलते ही संगीत प्रेमी संग्रहालय का रुख करने लगे। शाम 6:30 बजे बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी,विशिष्ट अतिथि जीओसी हेडक्वार्टर पूर्वी यूपी-एमपी सब एरिया न्यू कैंट मेजर जनरल जयसिंह बैंसला के साथ अधिवक्ता मुकेश प्रसाद ने दीप जलाकर शाम-ए-गजल का शुभारंभ किया।
हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा चांद... ये कागज की कश्ती... तेरे आने की जब खबर महके... जैसी गजलों से सुरों के सरताज जगजीत सिंह को रविवार को स्वरांजलि अर्पित की गई। इस दौरान सुर, लय, ताल की त्रिवेणी में गोता लगाने के लिए संगीत रसिक उमड़ पड़े। यह शाम-ए-गजल इलाहाबाद संग्रहालय परिसर में आयोजित थी। भव्य मुक्ताकाशीय मंच पर गजलों से सजी शाम का हर किसी को इंतजार था।
विज्ञापन
शाम ढलते ही संगीत प्रेमी संग्रहालय का रुख करने लगे। शाम 6:30 बजे बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी,विशिष्ट अतिथि जीओसी हेडक्वार्टर पूर्वी यूपी-एमपी सब एरिया न्यू कैंट मेजर जनरल जयसिंह बैंसला के साथ अधिवक्ता मुकेश प्रसाद ने दीप जलाकर शाम-ए-गजल का शुभारंभ किया। संग्रहालय के निदेशक राजेश प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद गजल गायक भूपेंद्र शुक्ला ने एक के बाद एक जगजीत सिंह की चुनिंदा गजलों को सुरों से सजाकर वाहवाही बटोरी। याद नहीं क्या-क्या देखा... होंठों से छू लो तुम... तुमको देखा तो ये ख्याल आया...झुकी झुकी सी नजर... जैसी गजलों के बाद उन्होंने दर्शकों की भी कई पेशकश पूरी की।
इनके साथ वायलिन पर उस्ताद अलीम खान,गिटार पर अरशद अहमद,हारमोनियम पर अनुराग मिश्रा, साइड रिदम पर आशीष भट्ट, ढोलक पर राजेश भट्ट,तबले पर अजय बनर्जी ने संगत की । संचालन शिवानी शांगलू ने किया। संग्रहालय के वित्त अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने आभार जताया। इस मौके पर केएन कुमार, अखिलेश मिश्रा, प्रमोद बंसल, संजीव सिंह ,प्रवीण कुमार सिंह, शरद शांगलू , प्रभा दास, प्रिया मेहरोत्रा समेत तमाम संगीत प्रेमी उपस्थित थे। यह कार्यक्रम इलाहाबाद संग्रहालय, संस्कृति मंत्रालय और जगजीत सिंह फैंस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।