रोडवेज बसों में डीजल भरने के लिए भेजे गए टैंकर में रविवार को पानी मिलने से हड़कंप मच गया। जानकारी मिलते ही राजापुर स्थित रोडवेज की वर्कशॉप में रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक समेत तमाम वरिष्ठ अफसर पहुंच गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक ने टैंकर को सील करने के साथ ही इंडियन ऑयल के अफसरों को इसकी सूचना भेजी। इस दौरान टैंकर संचालक को भी रोडवेज ने ब्लैक लिस्टेड कर दिया।
राजापुर में क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय के समीप ही प्रयाग डिपो, जीरोरोड और लीडररोड डिपो का वर्कशॉप है। यहां डीजल की सप्लाई इंडियन ऑयल द्वारा टैंकरों के माध्यम से की जाती है। रविवार को इंडियन ऑयल से प्रयाग डिपो वर्कशॉप में टैंकर आया तो उसकी जांच एआरएम विवेकानंद ने वाटर फाइडिंग टेस्ट के माध्यम से करवाई।
इस टेस्ट के तहत एक रॉड टैंकर में डाली जाती है। अगर टैंकर में पानी है तो रॉड लाल हो जाती है। रविवार को जांच के दौरान रॉड लाल हो गई। यह देखते ही एआरएम ने इसकी सूचना क्षेत्रीय प्रबंधक टीकेएस बिसेन को दी। इस बीच सूचना पाकर रोडवेज यूनियन के कुछ और पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए। यहां यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ अफसरों की इसमें सांठगांठ हैं। इसके पूर्व भी टैंकर में पानी निकल चुका है। क्षेत्रीय प्रबंधक ने सभी लोगों की बात सुनने के बाद टैंकर को सील कर दिया।
इसके अलावा टैंकर संचालक को भी ब्लैक लिस्टेड करने के साथ इसकी सूचना इंडियन ऑयल कारपोरेशन के अफसरों को दी। क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि टैंकर में 12 हजार लीटर के आसपास डीजल आता है। इसमें 50 से 100 लीटर के आसपास पानी होने की संभावना है। सोमवार को आईओसी के अफसरों द्वारा जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि टैंकर में कितना पानी है। उन्होंने कहा कि अगर यह डीजल बसों में पड़ जाता तो कई बसों के इंजन खराब हो जाते। इससे रोडवेज को लंबा नुकसान उठाना पड़ता।