उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को हवा से बना पानी उपलब्ध करवाने की तैयारी की है। इलाहाबाद जंक्शन समेत जोन के सभी प्रमुख स्टेशनों पर यह पानी यात्रियों को अगले वित्तीय वर्ष में पांच से आठ रुपये प्रति लीटर की दर से मुहैया करवाया जा सकता है।
इस दिशा में एनसीआर प्रशासन ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में एनसीआर प्रशासन इसके लिए प्रमुख स्टेशनों पर कियोस्क भी लगाएगा।
पिछले दिनों ही तेलंगाना के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर हवा से बनाए गए पानी की बिक्री रेलवे ने शुरू की है। जल शक्ति मंत्रालय की मेघदूत तकनीक को सेहत के अनुकूल और सुरक्षित माना गया है। इसके तहत ऑटोमेटिक वाटर जेनरेटर प्रतिदिन एक हजार लीटर पानी बना लेता है।
यह पानी स्टील के टैंक में जमा होता है। यही तकनीक एनसीआर प्रशासन भी अपनाने जा रहा है। इस संबंध में जीएम एनसीआर राजीव चौधरी ने इलाहाबाद मंडल के वरिष्ठ मंडल पर्यावरण एवं हाउस कीपिंग प्रबंधक को दिशा निर्देश दिए हैं।
एनसीआर के सीपीआरओ अजीत सिंह ने कहा कि निश्चित ही यह तकनीक बेहद उन्नत है। इससे गर्मी के दिनों में पानी की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। दो दिन पहले रेलमंत्री पीयूष गोयल ने भी सिकंदराबाद स्टेशन पर अपनाई गई इस तकनीक का वीडियो ट्वीट किया है।
ऐसे बनेगा पानी
इस तकनीक के तहत हवा का बहाव मशीन से गुजरता है। इससे उसमें मौजूद डस्ट पार्टिकल प्रदूषक तत्वों को सोख लेता है। इसके बाद हवा कूलिंग चैंबर में जाती है। जहां इसे ठंडा किया जाता है। इससे हवा पानी की बूंद में तब्दील होती है।
जमा हुआ पानी फिल्टर होने के बाद उसमें मौजूद दूसरे प्रदूषक तत्व हट जाते हैं। इस पानी अल्ट्रा वॉयलेट किरणों वाले सिस्टम से गुजारा जाता है। इसके बाद ही पानी पीने के योग्य हो जाता है। सिकंदराबाद स्टेशन में यह पानी पांच रुपये लीटर में बेचा जा रहा है।
‘इस तकनीक पर एनसीआर जोन ने काम शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में प्रमुख स्टेशनों पर कियोस्क लगाकर शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने की तैयारी है।’
-राजीव चौधरी, जीएम एनसीआर