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सेना से लीज पर ली जाएगी उपयोग वाली अतिरिक्त भूमि

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Additional land to be leased from army
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सेना से लीज पर ली जाएगी
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उपयोग वाली अतिरिक्त भूमि
0 अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि बोले
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर से जुड़े पक्के निर्माण के अतिरिक्त श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जो भी अतिरिक्त भूमि उपयोग में है, उसे सेना से लीज पर लिया जाएगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि अदालत के निर्देश के मुताबिक पक्के निर्माण से इतर टीन शेड में बनी यज्ञशाला, यात्री विश्राम गृह जैसे निर्माण के उपयोग में आई भूमि को सेना से लीज पर लेने के लिए मंदिर प्रबंधन जल्द ही कार्यवाही आरंभ करेगा।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि मंदिर का निर्माण किले से पहले का है। किले के कागजात में भी यह भूमि मंदिर या हनुमान जी के नाम से दर्ज है। इसी पर पक्का निर्माण कराया गया है। वर्ष 2009 में जब टीन शीट को तोड़कर पूजा के लिए हॉल बनवाया जा रहा था तो सेना ने नोटिस भेजा था। इस पर मंदिर प्रबंधन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया तो अदालत के आदेश के बाद पक्के निर्माण हुए।
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महंत नरेंद्र गिरि ने यह भी दावा किया कि किले के निर्माण के समय मंदिर को भीतर लेने की कोशिश की गई थी लेकिन किले की दीवार बार-बार ढह जाती रही। इसके बाद मंदिर को अलग करके किले की दीवार बनाई गई। अकबर के काल में ही तत्कालीन महंत पुरुषोत्तमानंद गिरि की देखरेख में यह जमीन मंदिर के नाम से दर्ज की गई थी। अब अदालत के आदेश के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उपयोग में ली गई अतिरिक्त भूमि भी सेना से लीज करा ली जाएगी।
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अद्भुत है लेटे हुए हनुमान का मंदिर
त्रिवेणी बांध स्थित मंदिर में सिद्ध आकर्षक प्रतिमा वाले लेटे हुए हनुमान है। उनके दक्षिण पैर के नीचे अहिरावण और बाएं पैर के नीचे इच्छाओं को पूरा करने वाली आराध्या कामदा देवी हैं। इस प्रतिमा को लेकर कई तरह की किंवदंतियां हैं। कहते हैं, संतान प्राप्ति की कामना से हनुमान प्रतिमा की स्थापना से कोई व्यापारी नाव में प्रतिमा लेकर जा रहा था लेकिन किले के पास पहुंचने पर नाव डूब गई और फिर तमाम कोशिशों के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक लंका विजय के बाद लौटने पर सीता ने हनुमान को सिंदूर का लेप करके यहीं पर विश्राम करने की आज्ञा दी थी। संगम पर डुबकी के बाद हनुमान के दर्शन से ही प्रयागराज की यात्रा पूरी होती है।
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