गंगा और यमुना में आए उफान के बाद पुरानी झूंसी के तटवर्ती आश्रमों के पास तक पहुंचा बाढ़ का पानी=
गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। बुधवार को दोनों नदियां सुबह से देर शाम तक उफान पर रहीं। इससे नई और पुरानी झूंसी के किनारे स्थित मकानों, मठों, मंदिरों और आश्रमों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया।
यदि यही स्थिति बनी रही तो अगले दो से तीन दिन के भीतर मठों, मंदिरों और आश्रमों के भीतर पानी दाखिल हो सकता है। ऐसे में प्रभावित लोग अब सुरक्षित स्थानों या अपने मकानों के ऊपरी हिस्सों में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
बुधवार की देर शाम तक बाढ़ का पानी आश्रमों और मठों की बाउंड्री की दीवारों से टकराने लगा था। इससे आश्रमों और मठों में मौजूद साधु-संतों तथा वेद छात्रों में भी खलबली देखी गई। तटवर्ती इलाकों के निवासियों ने बताया कि पिछले दो दिनों से गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नई झूंसी की ओर बाढ़ का पानी रिवर फ्रंट से टकरा रहा है। इसके साथ ही एसटीपी के आसपास भी पानी पहुंच गया है।
बुधवार को गंगा और यमुना के जलस्तर में दिनभर बढ़ोतरी दर्ज की गई। शाम तक बाढ़ का पानी नई और पुरानी झूंसी के किनारे बने मकानों, मठों, मंदिरों और आश्रमों के पास तक पहुंच चुका था। लगातार बढ़ते जलस्तर से लोगों की मुसीबतें और बढ़ने की आशंका है। यदि नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो अगले कुछ दिनों में स्थिति गंभीर हो सकती है।
सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे लोग
बाढ़ के खतरे को देखते हुए लोग अब सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं। कई परिवार अपने मकानों के ऊपरी हिस्सों में जाने की योजना बना रहे हैं। मठों और आश्रमों में रहने वाले साधु-संत तथा वेद छात्र भी चिंतित हैं। वे भी पानी के भीतर दाखिल होने से पहले वैकल्पिक व्यवस्थाएं तलाश रहे हैं।