गंगा-यमुना के लगभग अधिकांश घाट जलमग्न हो गए है। इस वजह से शवों को जलाने की व्यवस्था नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी फाफामऊ में हो रही है। यहां जगह नहीं होने पर लोगों को विद्युत शवदाह गृह का सहारा लेना पड़ रहा है।
गंगा-यमुना के लगभग अधिकांश घाट जलमग्न हो गए है। इस वजह से शवों को जलाने की व्यवस्था नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी फाफामऊ में हो रही है। यहां जगह नहीं होने पर लोगों को विद्युत शवदाह गृह का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे लोड बढ़ गया है। विद्युत शवदाह गृह के बाहर बड़ी संख्या में परिजन शवों को लेकर इंतजार कर रहे हैं। अव्यवस्थाओं के बीच चार घंटे इंतजार के बाद नंबर आ रहा है। वहीं, शंकरघाट पर बने विद्युत शवदाह गृह 11 माह से बंद पड़ा है। इससे लोगों को और असुविधा हो रही है।
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लाइट कटते ही बंद हो जाती है मशीन
वर्ष 2025 में ही नगर निगम ने फाफामऊ घाट पर विद्युत शवदाह गृह बनाया था। दो मशीनें लगाई गई हैं यानी एक साथ दो शवों को जलाया जा सकता है, लेकिन लाइट जाते ही मशीन बंद हो जाती है। शवाें के जलने से निकलने वाला धुआं चिमनी से निकलने के बजाय नीचे फैलने लगता है, ऐसी स्थिति में वहां खड़ा होना मुश्किल हो जाता है। जनरेटर तो एक माह पहले ही लगाया गया है लेकिन उसका कनेक्शन मशीन से नहीं किया गया है। यहां तैनात केयर टेकर अरविंद कुमार गौड़ बताते हैं कि जनरेटर का कनेक्शन न होने की वजह से दिक्कत हो रही है। कनेक्शन के लिए नगर निगम के उच्चाधिकारियों को बताया गया है।