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वसीम रिजवी पर चलेगा धार्मिक भावनाएं भड़काने का मुकदमा

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Wasim Rizvi will run a case of inciting religious sentiments
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प्रयागराज। यूपी शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी पर धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में मुकदमा चलेगा। इस संबंध में शासन की अनुमति मिल गई है। बता दें कि कोतवाली स्थित इमामबाड़े में अवैध निर्माण कराने व अन्य आरोपों में उन पर केस दर्ज कराया गया था। जिसमेें विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने शासन से धाराएं बढ़ाने के संबंध में अनुमति मांगी थी। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस ने आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है।
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कोतवाली के जीटी रोड पर स्थित गुलाम हैदर त्रिपोलिया इमामबाड़ा वक्फ संपत्ति है। जिसमें अवैध रूप से दुकानों का निर्माण कराने व कई बार नोटिस व सीलिंग की कार्रवाई करने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखने पर 26 अगस्त 2016 को कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। विकास प्राधिकरण के जेई सुधांक मिश्रा की तहरीर पर दर्ज इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी को नामजद किया गया था। मामले में पहले तो विवेचना के बाद पुलिस ने नामजदगी गलत बताते हुए वसीम रिजवी को क्लीन चिट दे दी थी। हालांकि शिकायत पर जांच के बाद अल्पसंख्यक आयोग के आदेश पर मामले की विवेचना फिर से की गई। जिसमें पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर वसीम रिजवी का नाम फिर से प्रकाश में आया। इसके साथ ही मामले में पूर्व में लगी धाराओं के अलावा किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान की क्षति करना(295ए), विभिन्न समुदायों के बीच शुत्रुता, घृणा, या वैमनस्य की भावना पैदा करना(505बी), दो वर्गो के बीच नफरत फैलाने, आपराधिक साजिश(120बी), 51 वक्फ बोर्ड एक्ट व पूजा स्थल विधेयक 1991 के तहत भी अपराध का होना पाया गया। जिसके बाद इन धाराओं की बढ़ोत्तरी के लिए शासन से अनुमति मांगी गई थी। साक्ष्यों व गवाहों के बयान के परीक्षण के बाद प्रदेश सरकार ने मुकदमे में धाराएं बढ़ाने की अनुमति प्रदान कर दी है। इस संबंध में पिछले दिनों गृह विभाग के विशेष सचिव रामनिवास शर्मा की ओर से एक पत्र एसएसपी को भेजकर जानकारी दी गई है। जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने मामले में आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है।
सीबीआई जांच की हुई है सिफारिश
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने पिछले साल शिया-सुन्नी वक्फ बोर्ड में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है। इसके लिए जिन दो मुकदमों को आधार बनाया है उनमें से एक शहर कोतवाली का है। इस मामले में पुलिस के साथ ही प्रशासन व एडीए की भी भूमिका पर सवाल खड़े हुए। ऐसे मेें इस बात की भी पूरी संभावना है कि सीबीआई तत्कालीन अफसरों से भी पूछताछ कर सकती है।
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